भोपाल। मध्यप्रदेश में खनिजों के अवैध परिवहन पर लगाम कसने के लिए सरकार ने निगरानी व्यवस्था को और सख्त करने की तैयारी कर ली है। अब खनिज लेकर चलने वाले वाहनों पर रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) टैग अनिवार्य करने की व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके बाद बिना निर्धारित टैग वाले वाहनों से खनिज परिवहन करना आसान नहीं होगा।
🚨 नंबर प्लेट बदलकर नहीं बच पाएंगे वाहन चालक!
अब तक कई मामलों में वाहन की नंबर प्लेट पर मिट्टी लगाने, नंबर छिपाने या पहचान बदलने जैसी तरकीबों से जांच से बचने की आशंका सामने आती रही है। नई तकनीक के जरिए वाहनों की पहचान और खनिज परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा, जिससे अवैध गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा।
25 जिलों में ई-चेक गेट, कंट्रोल रूम से होगी निगरानी
प्रदेश के 25 जिलों में 40 स्थानों पर ई-चेक गेट स्थापित किए गए हैं। इन गेटों को कंट्रोल रूम से जोड़कर खनिज परिवहन की निगरानी की व्यवस्था विकसित की जा रही है। भोपाल, जबलपुर, कटनी, शहडोल, सिंगरौली, रीवा समेत कई खनिज गतिविधियों वाले जिलों में यह व्यवस्था अहम भूमिका निभा सकती है।
🚛 वाहन की आईडी और ईटीपी का होगा मिलान
नई प्रणाली में वाहन की आरएफ आईडी और ईटीपी (इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिट पास) के रिकॉर्ड को आपस में जोड़ने की योजना है। वाहन में खनिज लोड होने के दौरान दर्ज जानकारी और चेक गेट पर मिलने वाले डेटा का मिलान किया जाएगा। रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित वाहन की जांच और नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।
💰 अवैध परिवहन पर करोड़ों के जुर्माने का रिकॉर्ड
उपलब्ध समाचार रिपोर्ट के अनुसार, ई-चेक गेट व्यवस्था के जरिए छह महीने में खनिजों के अवैध परिवहन के करीब 1,200 मामले दर्ज किए गए और लगभग 34 करोड़ रुपये की जुर्माना राशि बताई गई है। इससे साफ है कि खनिज परिवहन में तकनीकी निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब आगे क्या?
सरकार की इस पहल का उद्देश्य खनिजों की आवाजाही में पारदर्शिता बढ़ाना, राजस्व की चोरी रोकना और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान आसान बनाना है। यदि व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो अवैध खनन और परिवहन पर नियंत्रण की दिशा में यह अहम कदम साबित हो सकती है।
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