रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष संतोष जैन के नेतृत्व में श्रद्धा,भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाए जा रहे दशलक्षण पर्युषण महापर्व के नवें दिन उत्तम आकिंचन धर्म की विशेष आराधना की गई। इस अवसर पर जिनालयों में भगवान जिनेंद्र देव के अभिषेक,शांतिधारा,पूजन एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता कर धर्मलाभ लिया। धर्मसभा में विदुषी सुमन दीदी ने उत्तम आकिंचन धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि आकिंचन का अर्थ केवल बाहरी वस्तुओं का त्याग करना नहीं है, बल्कि मन के भीतर जड़ जमा चुके मोह, ममता, आसक्ति और परिग्रह की भावना का त्याग करना ही इसकी वास्तविक साधना है। अध्यक्ष संतोष जैन ने कहा कि पर्युषण महापर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन और जीवन को संयमित बनाने का अवसर है। उन्होंने समाजजनों से दशलक्षण धर्म की शिक्षाओं को अपने दैनिक जीवन में उतारने का आह्वान किया।


