भोपाल। प्रदेश की ट्रेजरी से होने वाले भुगतानों में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी और धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। विभागीय कर्मचारियों ने सरकारी तंत्र में सेंध लगाकर करीब 600 करोड़ रुपये की मोटी रकम अपने, परिजनों (पत्नी) और परिचितों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर ली। इसके अलावा कर्मचारियों के वेतन-भत्तों में बिना किसी प्रशासनिक मंजूरी के अतिरिक्त राशि जोड़कर भुगतान कर दिया गया।
*अलर्ट के बावजूद नहीं संभला सिस्टम*
हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर सिस्टम फेलियर का खुलासा वर्ष 2023 में ही हो गया था। उस समय गबन की राशि 160 करोड़ रुपये थी और 42 आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। तत्कालीन ट्रेजरी कमिश्नर ज्ञानेश्वर बी. पाटिल ने जनवरी 2024 में तत्कालीन डीजीपी सुधीर सक्सेना को पत्र लिखकर अलर्ट भी किया था। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कड़े कदम न उठाए जाने के कारण धोखाधड़ी जारी रही और बाद में 440 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
*199 संदिग्ध ट्रांजैक्शन से 305 करोड़ निजी खातों में*
जांच प्रक्रिया में 199 संदिग्ध लेन-देन का पता चला है, जिनके जरिए लगभग 305 करोड़ रुपये की सरकारी राशि अधिकारियों-कर्मचारियों से जुड़े निजी खातों में भेजी गई। नियमों के अनुसार यह राशि ट्रेजरी के पर्सनल डिपॉजिट (पीडी) खातों में सुरक्षित रखी जानी थी, लेकिन करीब 293 करोड़ रुपये नियमों को ताक पर रखकर निजी बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए।
*ऐसे लगाई गई सिस्टम में सेंध:*
* *फर्जी एम्प्लॉय कोड:* एक ही कर्मचारी के नाम पर दो अलग-अलग एम्प्लॉय कोड बनाकर दोहरा भुगतान लिया गया।
* *पासवर्ड साझा करना:* आहरण एवं संवितरण (DDO) अधिकारियों ने अपने गोपनीय लॉगिन-पासवर्ड कर्मचारियों के साथ साझा किए।
* *मोबाइल नंबर में फेरबदल*: सिस्टम में दर्ज कर्मचारियों के मोबाइल नंबर बदलकर जालसाजों ने अपने नंबर दर्ज किए, जिससे ट्रांजैक्शन के ओटीपी वास्तविक अधिकारी के बजाय आरोपियों के पास पहुँचने लगे।
*इन प्रमुख विभागों में दर्ज हुई एफआईआर:*
गबन के सबसे अधिक मामले स्कूल शिक्षा (45), राजस्व (43), पुलिस (12), फॉरेस्ट (9), स्वास्थ्य (8), पशुपालन-डेयरी (6) और कृषि, जल संसाधन व पीएचई (4-4) विभागों में सामने आए हैं। प्रमुख रूप से सेंट्रल जेल (भैरोगढ़, उज्जैन), गवर्नमेंट कॉलेज (बागली/हाटपिपल्या, देवास), बीईओ (कट्टीवाड़ा, आलीराजपुर), पुष्यराजगढ़ (अनूपपुर), डोरिया तहसील (नर्मदापुरम), डीएफओ (खंडवा), एसएएफ (धार), एसपी (होषंगाबाद), बीईओ (कसरावद, खरगौन; छिंदवाड़ा; तामिया; भिंड), पोहरी तहसील (शिवपुरी), सीएमएचओ (रायसेन) और कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (भोपाल) जैसे दफ्तर शामिल हैं।
*अब तक की रिकवरी और कार्रवाई*
जांच में स्टेट फाइनेंसियल इंटेलिजेंस सेल ने पाया कि 160 करोड़ की धोखाधड़ी के 42 मामलों में अलग-अलग थानों में एफआईआर तो हुई है, लेकिन जांच में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 और आईटी एक्ट 2000 की उचित धाराएं नहीं जोड़ी गई हैं।
वर्तमान में 600 करोड़ की गड़बड़ी में से लगभग 220 करोड़ रुपये रिकवर कर लिए गए हैं, जिसमें 56 करोड़ धोखाधड़ी के मामलों से और 164 करोड़ रुपये बैंक खातों को फ्रीज कर बरामद किए गए हैं। वर्तमान ट्रेजरी कमिश्नर अमनबीर सिंह बैंस के अनुसार, SNAIC द्वारा पकड़े गए पैटर्न के आधार पर सिस्टम में 50 से अधिक सुधार किए गए हैं।
*साभार दैनिक भास्कर*


