जबलपुर डाक संभाग में कर्मचारियों पर थोपे जा रहे अव्यावहारिक टारगेट तथा विभाग के क्रमिक निजीकरण के विरोध में उज्जैन डाक संभाग के कर्मचारियों का आंदोलन तेज हो गया है। कर्मचारियों ने लंच अवर्स में नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया।
भारतीय डाक कर्मचारी संघ, ग्रुप ‘सी’ के संभागीय सचिव श्री अनिल सिंह बागरी ने बताया कि कर्मचारियों की नियुक्ति डाकघरों में आने वाले ग्राहकों को सेवाएं देने के लिए हुई है, लेकिन अब उनसे कार्यालय का नियमित कार्य कराने के साथ-साथ घर-घर जाकर डाक जीवन बीमा, बचत खाते, स्पीड पोस्ट, पार्सल तथा अन्य योजनाओं के लिए नए ग्राहक जोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रबंधन के सिद्धांतों के अनुसार कार्यालयीन कार्य और मार्केटिंग की जिम्मेदारी अलग-अलग कर्मचारियों की होनी चाहिए। एक ही कर्मचारी से पूरे समय काउंटर पर कार्य कराने और फिर मार्केटिंग कर भारी-भरकम टारगेट पूरे करने की अपेक्षा करना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि कर्मचारियों के प्रति असंवेदनशील रवैये को भी दर्शाता है। जब कर्मचारी पूरे समय जनता को सेवाएं देने में व्यस्त रहता है, तब उससे घर-घर जाकर लक्ष्य पूरे करने की अपेक्षा व्यवहारिक नहीं है।
संभागीय सचिव श्री अनिल सिंह बागरी ने कहा कि डाक कर्मचारी सदैव आमजन को बेहतर, त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं, लेकिन अव्यावहारिक टारगेट और लगातार बढ़ते मानसिक दबाव के कारण गुणवत्तापूर्ण सेवा और लक्ष्य—दोनों के बीच संतुलन बनाना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई कर्मचारी दबाव में स्वयं के पैसे से खाते खुलवाने और बीमा कराने तक को विवश हो रहे हैं। इतना ही नहीं, एक लक्ष्य पूरा होते ही उससे कई गुना बड़ा नया लक्ष्य दे दिया जाता है, जिससे न सिर्फ कर्मचारियों बल्कि उनके परिवारों पर भी लगातार मानसिक तनाव बढ़ रहा है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों की जायज़ मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
वर्तमान में कर्मचारी काली पट्टी बांधकर कार्य कर रहे हैं तथा लंच अवर्स में प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बाद 5 अगस्त को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी। यदि इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी, जिसकी सूचना विभाग को पूर्व में ही दी जा चुकी है।


