*योगेश गजभिये पांढुरना*.सरकार मुसाफ़िरों की सुरक्षा सुविधा के लिए कई नियम बनाए जाते है मगर नियमों की अनदेखी के चलते प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी से नहीं किया जा रहा नियमों का पालन निजी बसों में न तो किराया सूची लगी है और न ही हेल्पलाईन नंबर व महिलाओं के लिए आरक्षण सीट पर भी पुरुष यात्री बैठकर यात्रा कर रहे है। साथ ही सामान भी बसों की छत पर रखा जा रहा है जिसकी उचाई भी कई बार बहुत अधिक होने से हादसे का खतरा बना रहता है।
पांढुरना रोड पर चलने वाली रूट की बसों में न तो किराया सूची चस्पा है और न ही अधिकांश बसों में हेल्पलाईन नंबर नहीं लिखे हुए है। वही पांढुरना से छिंदवाड़ा का किराया रू प्रति किलोमीटर के हिसाब से 121रू होना चाहिए है जबकि बस संचालको की मनमर्जी से 150रू वसूला जा रहा है जिसकी शिकायत कई बार लोग कर चुके है मगर परिवहन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस और ध्यान नही दे रहे है और लोग अधिक किराया देकर सफर करने को मजबूर है।
बसों में नही लिखा टोल है फ्री नंबर-
सरकार ने सभी यात्री बस में शिषो पर टोल फ्री नंबर सहित बस के परमिट नंबर बीमा फिटनेस वैध तारीख आदि लिखवाने के आदेश जारी किये थे लेकिन बस मालिको द्वारा इन आदेशों को हवा में उड़ाया जा रहा है और मनमानी जारी है।
ड्रेस कोड का नही हो रहा पालन-
नगर से चलने वाली अधिकांश बस के चालक या कन्डेक्टर ड्रेस में नहीं रहते है शासन ने सभी बसे के चालक व कन्डेक्टर के लिए ड्रेस कोड व नेम प्लेट तय किये है जिससे स्टॉफ को पहचाना जा सके व वाहन में किसी भी तरह की असुविधा होने पर यात्री शिकायत स्टॉफ से कर सके मगर यहां तो सभी नियमों की अनदेखी की जा रही है मगर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही भी नहीं की गई है जिससे नियमों का पालन हो सके ।
अधिकांश बसों की हालत कंडम-
बस में हो रहे है बड़े बड़े खोखले जब सवारी अपना सामान बस की सीट के अंदर रखती है तो उस सवारी को पता सामान उठाते वक्त पता चलता है कि अधिकतर बसे दौड़ रही है कंडम मेरा सामान नहीं मिल रहा है तो पता चलता है कि इसमें तो बड़ा सारा खोखला हो रहा है जिसमें से सामान गिर गया है कई सवारियों के जूते चप्पल भी गिर गये है। लेकिन बस में सफर कर रहे यात्रियों का कहना है कि यह कोई बस है इसमें से तो हमारा सामान गिर गया है तो कंडेक्टर का कहना है कि हम तो हमारे मालिक से बोल चुके है कि इस बस को बंद कर दो और दूसरी बस लाइन पर चलाओ लेकिन बस मालिक सुनते ही नहीं है हम क्या करे हम
पांढुरना के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कंडम हालत की बसें दौड़ रही है मगर जिला परिवहन अधिकारी द्वारा अभी तक इन बसों की न चेकिंग की है जिससे पता चल सके कि यह बस चलने लायक भी है या नहीं मगर परिवहन विभाग की अनदेखी के चलते कभी कोई बडी दुर्घटना न हो जाए। अधिकतर बसों का फिटनेस बीमा भी नहीं है मगर परिवहन विभाग द्वारा कोई चेकिंग भी नहीं की जा रही है जिससे तो कर्मचारी है कि नहीं कह ही न सकते है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि कही विभाग की मिलि भगत से सारा खेल तो नही चल रहा है।
पांढुरना बस में सीट के अंदर नही घूसते पाव
यात्री सफर अपनी सुविधा अनुसार करे यह सब चाहते है लेकिन जब बस के अंदर जाकर आप अपनी सीट पर बैठना चाहते है तो बस की सीट में अंदर पाव भी नही घूसते है। लेकिन जिला परिवहन अधिकारी नें बसों का कब से निरीक्षण नहीं किया है। जिससे उन्हें पता चल सके कि यह बस तो चलने लायक भी नहीं है। इसमें तो सफर करने वाली सवारियों के बैठने में भी परेशानी होती है लेकिन बस का निरीक्षण न करना कई सवाल खड़े कर रहा है।
अगर जिला परिवहन अधिकारी संज्ञान लेते है तो बस संचालक पर कार्यावाही हो सकती है अब देखना तो यह है कि बस संचालक पर कब तक कार्यवाही होंगी ।


