रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। इटारसी नगर के सुधार न्यास कॉलोनी क्षेत्र में रसूखदार भाजपा नेता द्वारा संचालित मुस्कान बालिका गृह से 3 साल में 5 नाबालिक बच्चियों के रहस्यमय रूप से लापता होने का मामला इटारसी पुलिस के लिए अब चुनौती बन गया है। जहां इटारसी पुलिस ने उक्त मामले में शुक्रवार रात एफआईआर दर्ज कर ली है। वही पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा एस थोटा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक एसआईटी गठन किया है जो पूरे मामले की जांच करेगी। इसके बाद से हड़कंप मच गया है। पूरे मामले में खास बात यह है कि विगत 3 साल में 5 नाबालिक बच्चियों के गायब होने के मामले में बालिका गृह के संचालक द्वारा एफआईआर दर्ज कराने में हुई देरी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिससे संस्था की कार्य प्रणाली और सुरक्षा प्रबंधन पर भी बड़े सवाल खड़े होते हैं। नियम के मुताबिक ऐसे मामलों में 24 घंटे के अंदर एफआईआर दर्ज होना चाहिए थी। वहीं इटारसी थाना प्रभारी सौरभ पांडे का कहना रहा कि संस्था ने 5 नाबालिक बालिकाओं के भागने की शिकायत एक साथ दी है। जिस पर हमने FIR दर्ज कर ली है। मैने करीब एक माह पूर्व इटारसी थाना प्रभारी का पदभार ग्रहण किया है। जांच शुरू कर दी गई है। वहीं मीडिया खबर के अनुसार संस्था संचालक और भाजपा नेता मनीष ठाकुर का मामले में कहना रहा कि उन्होंने 3 जुलाई को हुई बाल कल्याण समिति की बैठक में इस मुद्दे पर पुलिस अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया था। जिसके बाद एफआईआर दर्ज हुई है। आवेदन मिलने पर शुक्रवार 17 जुलाई को थाना इटारसी में अपराध क्रमांक 638/26, 639/26, 640/26, 641/26, 642/26 धारा 137(2) BNS के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। इस संवेदनशील एवं गंभीर घटना को दृष्टिगत रखते हुए शनिवार को पुलिस अधीक्षक के निर्देशन पर एएसपी अभिषेक राजन , एसडीओपी वीरेंद्र मिश्रा, थाना प्रभारी इटारसी निरीक्षक सौरभ पांडे, थाना प्रभारी महिला थाना निरीक्षक राखी मौर्य एवं थाना प्रभारी पथरौटा उनि मोनिका गौर द्वारा मुस्कान बालिका गृह पहुंचकर वहां की सम्पूर्ण व्यवस्था का गहन जायजा लिया गया एवं महत्वपूर्ण जानकारी एकत्रित की गई । जांच के दौरान संस्था के द्वारा गुमशुदगी की सूचना देने संबंधी कोई दस्तावेज एवं तथ्य नहीं पाए गए । वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक द्वारा एसआईटी गठित की गई है। फिलहाल मामले को लेकर हड़कंप मचा हुआ है।
वही सवाल यह भी उठता है कि आखिर जिले में संचालित बाल कल्याण समिति क्या समय-समय पर बाल देखरेख और पुनर्वास संस्थाओं (बालिका गृह/ बालक गृह) का आवश्यक निरीक्षण भी करते हैं? क्या उन्हें निरीक्षण के दौरान इस प्रकार की अनियमिता संज्ञान में नहीं आई? वही पिछले सालों में बाल कल्याण समिति ने जब उक्त मुस्कान बालिका गृह में निरीक्षण किया था तब भी ऐसा कोई मामला संज्ञान में नहीं आया जो कि बाल कल्याण समिति के जवाबदार सदस्यों पर भी सवाल खड़े करते हैं जिन्हें निरीक्षण में उन्होंने इस खामी को कैसे नहीं जाना या फिर नजरअंदाज किया ? सूत्रों की माने तो जिले में संचालित बाल कल्याण समिति जिले के समस्त बालिका गृह एवं बालक गृह का समय-समय पर निरीक्षण भी करते हैं पर इतनी बड़ी लापरवाही से वह कैसे चूक गए पर भी सवाल है की संस्था में विगत 3 सालों से नाबालिक बच्चिया गायब थी और उन्हें भनक तक नहीं लगी इस पर भी जांच होना चाहिए ? महिला एवं बाल विकास विभाग को भी ऐसी समिति के सदस्यों और स्पोर्टिंग पर्सन पर भी निगरानी रखना चाहिए कि वह किस प्रकार से संस्था का निरीक्षण कर रहे हैं और अपना जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हैं जो उन्हें संस्था से नाबालिक बालिका किन परिस्थियों में भागी की जानकारी तक नहीं रही है?? फिलहाल एसपी द्वारा एसआईटी का गठन किया गया है जो उक्त संवेदनशील मामले की जांच कर रही है।


