समाज को नई सोच का संदेश: किन्नर रेशमा और सागर राजपूत ने लिए सात फेरे
बारां जिले में एक विवाह ने सामाजिक समानता, स्वीकार्यता और रिश्तों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। शाहाबाद उपखंड के देवरी गांव की रहने वाली किन्नर सोनू उर्फ रेशमा और मध्य प्रदेश के गुना जिले के कोलीपुरा निवासी सागर राजपूत विवाह बंधन में बंध गए।
जानकारी के अनुसार, दोनों पिछले करीब एक वर्ष से एक-दूसरे के संपर्क में थे। इस दौरान आपसी विश्वास, सम्मान और अपनापन बढ़ता गया, जिसके बाद उन्होंने अपने रिश्ते को विवाह का रूप देने का निर्णय लिया।
बताया गया कि जब सागर ने रेशमा के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, तो उन्होंने समाज की प्रतिक्रिया और लोगों की सोच को लेकर शुरुआत में संकोच जताया। हालांकि सागर ने भरोसा दिलाया कि उनके लिए रिश्ते की सच्चाई, प्रेम और एक-दूसरे का साथ सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इसके बाद दोनों ने परिवार और करीबी लोगों की सहमति से विवाह करने का फैसला किया।
शाहाबाद कस्बे के एक मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह संपन्न हुआ। पंडित लखन लाल शर्मा ने सभी वैवाहिक रस्में संपन्न कराईं। अग्नि को साक्षी मानकर दोनों ने सात फेरे लिए और जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया।
विवाह समारोह में रेशमा के परिवार के सदस्य, किन्नर समुदाय के लोग और दोनों के करीबी मित्र मौजूद रहे। सभी ने नवदंपती को शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की।
विवाह के बाद रेशमा ने कहा कि सागर ने उनसे शादी कर यह संदेश दिया है कि किसी व्यक्ति की पहचान उसकी सामाजिक श्रेणी से नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व, व्यवहार और रिश्तों से होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समाज में सकारात्मक बदलाव के साथ किन्नर समुदाय को भी सम्मान, समान अवसर और बराबरी का स्थान मिलेगा।
यह विवाह केवल दो लोगों के जीवन का नया अध्याय नहीं, बल्कि सामाजिक स्वीकार्यता, समानता और मानवीय रिश्तों की नई सोच का भी एक महत्वपूर्ण संदेश


