*योगेश गजभिये पांढुरना*. कृषि कार्यों से संबंधित वाहनों, उपकरणों पर सरकार तमाम रियायतें देती हैं। ताकि किसानों को कृषि कार्य में किसी तरह की परेशानी न आए कुछ इसी तरह की रियायत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर मिलती है, जिनका कृषि कार्य के लिए पंजीयन कराने पर कम खर्च आता है, लेकिन व्यवसायिक उपयोग करने पर राशि बढ़ जाती है। इसके विपरीत शहर में पिछले काफी समय से नियम विरुद्ध तरीके से ट्रेक्टर ट्रॉलियों का संचालन किया जा रहा है जो न सिर्फ शासन को लाखों रुपए के टैक्स की चपत लगा रहे हैं बल्कि गंभीर हादसों का कारण भी बन रहे हैं।
यही नहीं शहर की मुख्य सड़क पर मार्ग के दोनों ओर बिल्डिंग मटेरियल से भरी ट्रेक्टर ट्रॉलियों के रखे रहने से काफी चौड़ी सड़क संकुचित हो गई है। जिससे भारी वाहनों को आने जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है इसके बावजूद जिम्मेदार महकमा यह सब देखकर भी अनजान बना हुआ है। अधिकारियों के उदासीन रवैए के कारण दिन प्रतिदिन रोड पर खड़े होने वाले ट्रेक्टर ट्रॉली सहित अन्य लोडिंग वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। शासन के नियमानुसार यदि ट्रेक्टर ट्रॉली का उपयोग कृषि कार्य में न करते हुए व्यवसायिक रूप में किया जाना है तो उसका पंजीयन उसी हिसाब से होता है और वाहन मालिक को रजिस्ट्रेशन के साथ टैक्स भी जमा करना होता है। लेकिन वाहन मालिक टैक्स को बचाने के लिए ट्रेक्टर ट्रॉली का रजिस्ट्रेशन कृषि कार्य के लिए करवाकर उसे व्यवसायिक उपयोग में लगा रहे हैं। यही वजह है शहर में लगातार ट्रेक्टर ट्रॉलियों की संख्या बढ़ती जा रही है। जो शहरवासियों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन रहे हैं। लेकिन इस ओर न तो ट्रेफिक पुलिस ध्यान दे रही है और न ही स्थानीय प्रशासन खास बात यह भी है कि कृषि कार्यों में इस्तेमाल किए जाने ट्रैक्टर-ट्रॉली से बिल्डिंग मटेरियल ले जाने से शासन को राजस्व का नुकसान भी होता है, क्योंकि बिल्डिंग मटेरियल का परिवहन करने के लिए खनिज विभाग में पंजीयन की आवश्यकता होती है और एक शुल्क भी जमा होता है। लेकिन अधिकांश मामलों में कृषि कार्यों के लिए इस्तेमाल करने वाले ट्रॉली से ही लोग भसुआ और रेत का परिवहन करते हैं। ऐसे में सरकार को राजस्व की भारी हानि होती है। बिल्डिंग मटेरियल से भरे ओवर लोड ट्रैक्टर ट्रॉली की वजह से शहर में अब तक कई बार हादसे हो चुके हैं। घटना के बाद आमजजन के विरोध के करने वालों के बीच विवाद हुआ था।
प्रशासन ने कुछ समय के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली के रिहायशी इलाकों में प्रतिबंध भी लगा दिया था लेकिन यह पाबंदी ज्यादा दिन नहीं चल सकी। इसका नतीजा यह हुआ कि धीरे-धीरे शहर में बिना रजिस्ट्रेशन व बीमा के ट्रैक्टर ट्रॉलियों की संख्या बढ़ती जा रही है। क्षेत्र में एक घटना का मामला काफी दिनों तक चर्चा में रहा था। यहां एक ड्राइवर के साथ स्थानीय लोगों ने बुरी तरह मारपीट की थी।
यहां रहता है जमावड़ा
शहर में कृषि उपज मंडी गेट से लेकर सड़क के दोनों और मैन रोड़ तक बड़ी संख्या में ट्रेक्टर ट्रॉली, ट्रक, मेटाडोर बिल्डिंग मटेरियल से भरे हुए अलसुबह से लेकर रात भर रखे रहते हैं। ऐसी ही स्थिति विभिन्न वार्डों में तक बनी हुई है। जहां अव्यवस्थित सड़क किनारे ट्रैक्टर ट्रॉली खड़ी रहती है। कृषि कार्य के लिए रजिस्टर्ड ट्रेक्टर ट्रॉलियों का उपयोग शहर में न सिर्फ बिल्डिंग मटेरियल को दोने में किया जा रहा है बल्कि पीडीएस के खायात्र को गोदाम से दुकान तक पहुंचाने में भी किया जा रहा है। इसके अलावा मंडी में सामग्री दोने, किरायेदारों का सामान यहां से वहां पहुंचाने सहित कई तरह के ऐसे काम किए जा रहे हैं, जिनके लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली अधिकृत नहीं है।


