कटनी जिले के रीठी वन परिक्षेत्र क्षेत्र और आसपास के गांवों में बनाए गए तेंदूपत्ता संग्रहण केंद्र यानी फड़ में भारी अव्यवस्था देखने को मिल रही है। भीषण गर्मी में पत्ता तोड़ने वाले सैकड़ों संग्राहकों को फड़ पर न तो पीने का साफ पानी मिल रहा है, न ही धूप से बचने के लिए टेंट या छाया की उचित व्यवस्था की गई है।
सबसे गंभीर बात ये है कि वर्षो से गरीब मजदूर जगली जानवरो का खतरा लेकर सुबह 5 बजे से दोपहर तक जंगल में पत्ता तोड़ते हैं। मजदूरी के साथ साथ हमे सीजन का बोनस सालो अभी तक नहीं मिला है lहम गरीब कहां जाए एक बार चप्पल, जूता, साड़ी और पानी की बाटल मिली थीl चाहे वह उपहार रहा हो या बोनस,,l
जबकि नियमानुसार फड़ पर संग्राहकों के लिए पेयजल, छाया, प्राथमिक उपचार और वजन के लिए सही कांटे की व्यवस्था होना अनिवार्य है। जिससे पत्तों की तौल में किसी भी प्रकार गड़बड़ी की आशंका न रहे l
गौरतलब है कि तेंदूपत्ता संग्रहण आदिवासी और वनवासी परिवारों की आय का मुख्य जरिया है। एक सीजन में एक परिवार 15 से 20 हजार रुपये तक कमा लेता है। बोनस न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है।
जबकि सरकार 400 रुपये प्रति सैकड़ा गड्डी और 60 हजार तक की स्कॉलरशिप देने का वादा कर रही है और दूसरी तरफ फड़ की ये हालत है।मजदूरों मिलने वाले बोनस तो दूर की बात है यहां पीने के पानी की उत्तम व्यवस्था के साथ-साथ छाया भी नदारत है l
फड़ पर लगे सूचना बोर्ड के अनुसार इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण दर 400 रुपये प्रति सैकड़ा गड्डी निर्धारित है। साथ ही संग्राहक परिवारों के बच्चों के लिए 15 हजार से 60 हजार तक की छात्रवृत्ति का प्रावधान है। लेकिन संग्राहकों का आरोप है कि कागजी वादों के विपरीत जमीनी हकीकत में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रहीं।
इस संबंध में रीठी के वन परिक्षेत्र अधिकारी महेश पटेल से बात की गई तो उनका कहना है कि व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराया जा रहा है। जहां शिकायत मिलेगी, वहां तत्काल कार्रवाई होगी। बोनस वितरण की प्रक्रिया ऊपर से ही होती है l


