बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने को लेकर सरकार बेहद गंभीर है। इसके लिए लाखो रूपए खर्च कर हर सुविधाएं उपलब्ध भी कराई जा रही हैं l वहीं कुछ गैर जिम्मेदार शिक्षक सरकार के अरमानों पर पानी फेर रहे हैं। यही वजह है कि नौनिहालों को न तो सुविधाएं मिल पा रही हैं और न ही ठीक ढंग से पठन-पाठन हो रहा है।
ऐसा ही कुछ नजारा बहोरीबंद जनपद शिक्षा केंद्र क्षेत्र की प्राथमिक शाला अमंगवा में देखने को मिला l
जहा शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां पढ़ने वाले छात्र अक्सर शिक्षकों के इंतजार में पूरा समय गुजार देते हैं l और शिक्षक स्कूल नहीं पहुंचते । ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि यह स्थिति कोई नई नहीं है, लंबे समय से यहां यही हालात बने हुए हैं। बताया जाता है कि स्कूल में कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि बच्चे समय पर स्कूल पहुंचकर कक्षाओं में बैठ जाते हैं, लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षक नदारद रहते हैं। बच्चे घंटों तक शिक्षक के आने का इंतजार करते रहते हैं। और मध्यान भोजन के बाद घर चले जाते हैं l जिससे पूरा दिन ही बिना पढ़ाई के गुजर जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी शिक्षकों से इस संबंध में पूछा जाता है तो वे जनपद शिक्षा केंद्र के काम में व्यस्त होने या किसी प्रशासनिक कार्य में लगे होने का बहाना बताते हैl वही बताया जाता है कि यहां के शिक्षक अरविंद झरिया को शासकीय सीनियर अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास का प्रभार भी दिया गया है l
वहीं छात्रों ने बताया कि शिक्षक कभी कभार आते हैं l और पढ़ाते नही है,मोबाइल चलाते रहते है l जब वह नही आते तो उनकी जगह पर दूसरा कोई पढ़ने के लिए आता है l
और आज कोई नही आया पढ़ाने l
ग्रामीणों का आरोप है कि कई शिक्षक स्कूल समय में ही अन्य जगहों पर घूमते नजर आते हैं, जबकि बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी पूरी नहीं की जा रही है। वे अपने बच्चों को शिक्षा के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन जब शिक्षक ही स्कूल में उपस्थित नहीं रहते तो बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी।
उनका कहना है कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ कर्मचारियों की लापरवाही के कारण इन प्रयासों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की जांच कराई जाए और स्कूल में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यार्थियों को समय पर शिक्षा मिल सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में बच्चों की पढ़ाई और भी प्रभावित हो सकती है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
हरिशंकर बेन


