अभियान का हिस्सा है, जिसमें परंपरागत लकड़ी की जगह गौ‑काष्ठ (गोबर की बनी लकड़ी/कंडे) से होलिका दहन करने की पहल की जा रही है, ताकि वृक्ष‑कटाई कम हो और प्रदूषण घटे। गौ‑काष्ठ क्यों अपनाएंगौ‑काष्ठ गाय के गोबर और सूखे गोबर के कंडों से बनता है, जिससे पेड़ों की कटाई नहीं होती और वायु प्रदूषण भी कम होता है। इससे गौशालाओं की आय बढ़ती है, गोबर का उपयोग होता है और त्योहार को पर्यावरण‑अनुकूल बनाने में मदद मिलती है। मुख्यमंत्री द्वारा प्रशस्ति‑पत्रमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उन संस्थाओं और पदाधिकारियों को प्रशस्ति‑पत्र देकर सम्मानित करेंगे, जो पूर्ण रूप से गौ‑काष्ठ आधारित होलिका दहन करवाएंगे। ऐसी संस्थाओं को भविष्य में अन्य योजनाओं/प्रोत्साहन में प्राथमिकता भी दी जाएगी। निःशुल्क पंजीयन कैसे करेंअपने नगरीय निकाय (नगर निगम/नगर पालिका) या जनपद पंचायत के कार्यालय में संपर्क करके अपने क्षेत्र के होलिका दहन कार्यक्रम का निःशुल्फ पंजीयन कराया जा सकता है। पंजीयन के समय संस्था का नाम, पदाधिकारियों के नाम और संपर्क विवरण देने होंगे; इससे गौ‑काष्ठ आधारित होलिका की पहचान व सम्मान सुनिश्चित होगा।
*संवाददाता शुभम सहारे छिंदवाड़ा*


