रीवा में एक शादी समारोह के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने रिश्तों के भरोसे और बच्चों की डिजिटल दुनिया पर कई सवाल खड़े कर दिए। सीधी जिले के बघेड़ी गांव की रहने वाली एक महिला अपने नाबालिग बेटे के साथ शादी में शामिल होने आई थी, लेकिन यह खुशी का मौका जल्द ही चिंता और सदमे में बदल गया।
शादी से लौटने के बाद महिला ने अपने कीमती जेवरात सुरक्षित समझकर टिफिन में रख दिए। कुछ देर बाद जब उसने टिफिन देखा, तो उसमें रखे गहने गायब थे। लाखों के जेवरात चोरी होने की आशंका से महिला घबरा गई और तुरंत चोरहटा थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
पुलिस जांच के दौरान एक और हैरान करने वाली बात सामने आई—महिला का नाबालिग बेटा भी अचानक लापता था। पुलिस ने जब मोबाइल लोकेशन ट्रेस की तो उसकी मौजूदगी पहले चोरहट और फिर सीधी जिले के जमोड़ी क्षेत्र में मिली।
पुलिस टीम ने बच्चे को बरामद कर पूछताछ की। शुरुआत में उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती के बाद उसने सच्चाई कबूल कर ली।
दोस्त के घर छिपाए थे 15 लाख के जेवर
नाबालिग ने बताया कि उसने अपनी मां के जेवरात अपने एक नाबालिग दोस्त के घर छिपा दिए थे। पुलिस ने देर रात दबिश देकर करीब 15 लाख रुपये मूल्य के सभी गहने सुरक्षित बरामद कर लिए।
ऑनलाइन गेमिंग बना अपराध की वजह
चोरहटा थाना प्रभारी आशीष मिश्रा के अनुसार, पूछताछ में यह सामने आया है कि नाबालिग ऑनलाइन गेमिंग का आदी है। गेम से जुड़े लेन-देन और संभावित नुकसान की भरपाई के लिए उसने यह कदम उठाया।
मां ने जताया सुकून, समाज को दी चेतावनी
पीड़ित महिला ने कहा कि गहने वापस मिलने से उसे राहत मिली है। बेटे ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है और भविष्य में ऐसा न करने का आश्वासन दिया है।
यह घटना साफ संदेश देती है कि बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना अब सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि जिम्मेदारी बन चुका है। गेमिंग की लत कब गलत रास्ते पर ले जाए—यह इस मामले से साफ झलकता है।


