रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। इटारसी तहसील के अंतर्गत केसला ब्लॉक के ग्राम ताकू के आदिवासी भगन काजले की कृषि भूमि को वन विभाग द्वारा स्वयं की बताकर,उसकी कृषि भूमि एवं कृषि कार्य को अनुचित एवं अवैधानिक रूप से रोकने का प्रयास के मामले में इटारसी तृतीय जिला न्यायाधीश आदित्य रावत की अदालत ने प्रकरण के तथ्यों, दस्तावेजों एवं प्रस्तुत दलीलों का सूक्ष्मता से अवलोकन करने के उपरांत वन परिक्षेत्र सहायक केसला, वन मंडलाधिकारी सामान्य, मुख्य वन संरक्षक अधिकारी व कलेक्टर नर्मदापुरम को उक्त भूमि पर किसी भी प्रकार का वैधानिक हस्तक्षेप करने से स्थाई रूप से निषेधित कर दिया है। उक्त मामले की पैरवी नर्मदापुरम के विद्वान अधिवक्ता चंदन शाहा द्वारा की गई है। अधिवक्ता श्री शाह ने बताया कि
केसला ब्लॉक के ताकू निवासी भगन काजले की कृषि भूमि 79/2, 79/2ख को वन विभाग के अधिकारियों द्वारा अपनी बताकर कृषि भूमि सहित कृषि कार्य को रोकने का प्रयास किया गया। भगन काजले द्वारा कृषि भूमि का मालिकाना हक एवं राजस्व से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए, किंतु वन विभाग द्वारा उक्त दस्तावेजों की अनदेखी करते हुए उसकी कृषि भूमि को वन भूमि बताकर उसके कृषि कार्य एवं मालिकाना हक में निरंतर हस्तक्षेप जारी रखा गया। पीड़ित आदिवासी भगन काजले ने वन विभाग से लेकर कलेक्टर तक लिखित शिकायत कर अपनी वेदना एवं प्रताड़ना से अवगत कराया परंतु न्याय नहीं मिलने पर न्यायालय की शरण अपने अधिवक्ता सहित पहुंचे। जवाबदारों के विरुद्ध सिविल न्यायालय इटारसी में वाद प्रस्तुत किया। प्रकरण में भगन काजले द्वारा अपने मालिकाना हक एवं राजस्व अभिलेखों से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत कर वन विभाग द्वारा उसकी भूमि पर हस्तक्षेप न किए जाने की गुहार लगाई गई।
उक्त प्रकरण में वन विभाग एवं कलेक्टर द्वारा पैरवी की गई तथा कलेक्टर के आदेश एवं राजस्व दस्तावेजों को चुनौती देते हुए भगन काजले के स्वत्व एवं आधिपत्य को प्रश्नगत किया गया। प्रकरण के विचारण उपरांत सिविल न्यायालय द्वारा उक्त वाद को खारिज कर दिया गया। किंतु भगन काजले ने न्याय प्राप्ति की अपनी लड़ाई में हार न मानते हुए अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखते हुये वरिष्ठ न्यायालय इटारसी के समक्ष सिविल न्यायालय के आदेश को चुनौती दी। भगन काजले की उक्त अपील में उसकी ओर से अधिवक्ता चंदन शाहा ने पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष उसके पक्ष में सशक्त एवं ठोस दलील प्रस्तुत किए। जिसके उपरांत न्यायालय तृतीय जिला न्यायाधीश इटारसी आदित्य रावत की अदालत ने प्रकरण के तथ्यों, दस्तावेजों एवं प्रस्तुत दलीलों का सूक्ष्मता से अवलोकन कर भगन काजले की अपील स्वीकार करते हुये अपने आदेश द्वारा वन विभाग नर्मदापुरम के वन परिक्षेत्र सहायक कार्यालय सहायक केसला, वन मण्डलाधिकारी कार्यालय नर्मदापुरम, मुख्य वन संरक्षक अधिकारी कार्यालय वन वृत्त नर्मदापुरम एवं कलेक्टर नर्मदापुरम को आदेशित किया गया कि वह भगन काजले की मालिकाना हक की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैधानिक हस्तक्षेप करने से स्थायी रूप से निषेधित कर दिया।


