भोपाल
मोहन यादव ने पंचायत सचिवों को ग्रामीण विकास की रीढ़ बताते हुए उनके हित में कई अहम घोषणाएँ कीं। राजधानी भोपाल के बीएचईएल दशहरा मैदान में आयोजित प्रदेश स्तरीय पंचायत सचिव सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत सचिवों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई है और उन्हें सातवां वेतनमान प्रदान किया जाएगा। इसके आदेश जारी हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचायत सचिवों को विशेष भत्ते का लाभ भी मिलेगा। सेवाकाल के दौरान मृत्यु की स्थिति में परिवार को दी जाने वाली 1.50 लाख रुपये की आकस्मिक सहायता राशि, अनुकंपा नियुक्ति के बाद वापस नहीं ली जाएगी। उन्होंने कहा कि वेतनमान व अन्य सेवा शर्तों पर विचार के लिए समिति का गठन किया जाएगा।
ग्रामीण भारत की भूमिका पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों का सशक्तिकरण ही देश के विकास की कुंजी है। इसी लक्ष्य के साथ राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में भी उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने वर्ष 2026 को ‘कृषि कल्याण वर्ष’ घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन, मत्स्य पालन और लघु-कुटीर उद्योग सहित 16 विभागों की योजनाएँ पंचायत स्तर तक पहुँचेंगी।
मुख्यमंत्री ने पंचायत सचिवों की भूमिका को नीति-निर्णयों को धरातल पर उतारने वाला बताया और कहा कि डिजिटल भारत के निर्माण के लिए उन्हें आवश्यक तकनीकी संसाधनों से लैस किया जा रहा है। जिला स्तर पर कैडर गठन की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।
इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि ग्राम सभा से लेकर विकास कार्यों के क्रियान्वयन तक हर प्रक्रिया की धुरी पंचायत सचिव हैं। उनका दायित्व केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि जनसेवा का दायित्व है।
राज्य सरकार द्वारा पंचायतों के लिए अटल भवन, सामुदायिक भवन, प्रशिक्षण, प्रतिनिधियों के मानदेय व वाहन भत्तों में वृद्धि तथा सरपंचों को 25 लाख रुपये तक के कार्य स्वीकृत करने का अधिकार दिए जाने की जानकारी भी दी गई।


