छिन्दवाड़ा/29 दिसंबर 2025/ पेसा महोत्सव 23 व 24 दिसंबर 2025 आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम में जनजातीय समुदाय का राष्ट्रीय पर्व मनाया गया। भारत सरकार पंचायतराज मंत्रालय दिल्ली के तत्वाधान में भारत के 10 आदिवासी बहुल राज्यों के पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्र का विस्तार अधिनियम 1996 के तहत लागू पेसा क्षेत्र की विभिन्न जनजाति समुदायों को आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम में एक राष्ट्रीय मंच प्रदान किया।
इसी तारतम्य में 10 राज्यों में 24 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय पेसा दिवस उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव व पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री श्री प्रहलाद पटेल के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी एवं संचालक (आई.ए.एस) पंचायतराज संचालनालय भोपाल श्री छोटे सिंह के मार्गदर्शन में पेसा महोत्सव का सफल आयोजन हुआ।
प्रदेश के 20 आदिवासी बहुल क्षेत्र से चयनित 9 जिले अलीराजपुर, झाबुआ, धार, बैतूल, छिंदवाड़ा, बालाघाट, अनूपपुर, उमरिया एवं डिंडोरी से सांस्कृतिक मंच, हस्तशिल्प कला, स्थानीय व्यंजन, खिलाड़ी खेल के प्रतिभागी एवं सरपंच जन प्रतिनिधि 152 सदस्य शामिल थे। पेसा महोत्सव का राज्य से प्रतिनिधित्व पेसा नोडल श्री राजेश यादव एवं श्री कुंवर वकार नसीम ने किया। महोत्सव में मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्र के जनजाति समुदाय द्वारा आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम में विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया।
छिंदवाड़ा जिले से पेसा जिला समन्वयक श्री कमलेश टेकाम के नेतृत्व में 18 प्रतिभागी शामिल हुये, जिसमें पातालकोट की पेसा टीम के द्वारा आदिवासी व्यंजन मोटे अनाज ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी, रागी के ताजा शुद्ध और स्वादिष्ट पकवान और महुआ एवं तिल, गुड के लड्डू, चक्की, बिस्किट का आगंतुकों ने भरपूर आनंद उठाया। विकासखंड हर्रई से पंचायत प्रतिनिधि सरपंच श्रीमती शारदा उइके एव श्रीमती संगीता धुर्वे ने पेसा महोत्सव में भाग लिया। इस दौरान विशाखापट्टनम की अलग-अलग ग्राम पंचायत में भ्रमण कर स्थानीय पंचायत को स्वयं सरपंच के द्वारा अपने क्षेत्र विशेष में किए गए विशेष कार्य और सफलता की कहानी को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। इसमें मुख्य रूप से ग्राम सभा की शक्तियां, शांति एवं सुरक्षा समिति के कार्य, भूमि प्रबंधन, जल संसाधन, खान एवं खनिज संपदा, मादक पदार्थ पर नियंत्रण, गौण वन उपज, हाट बाजार मेलों का नियंत्रण और साहूकारी जैसी प्रथाओं को खत्म करने के लिए किये गए प्रयास और कानून, कार्य एवं दायित्वों के विषय में समुदाय को बताया गया।
*संवाददाता शुभम सहारे छिंदवाड़ा*


