कटनी। जिले के ग्रामीण अंचलों—रीठी, बहोरीबंद, ढीमरखेड़ा, बड़वारा और विजयराघवगढ़—में धान खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है। किसानों ने बताया कि सरकारी पोर्टल पर स्लॉट बुकिंग का लिंक देर रात बारह बजे के आसपास खुलता है, कई बार लिंक खुलने के कुछ ही मिनटों में सभी स्लॉट फुल हो जाते हैं, जिससे किसान परेशान और निराश हो जाते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे किसानों ने बताया कि उन्हें रात-रात भर मोबाइल हाथ में लेकर जागना पड़ता है, ताकि धान खरीदी केंद्र में नंबर मिल सके। लेकिन लिंक खुलते ही कुछ ही पलों में बुकिंग पूरी हो जाती है। किसानों का आरोप है कि बड़े व्यापारी तकनीकी तरीके अपनाकर तेज़ी से स्लॉट बुक कर लेते हैं। वहीं, कुछ किसान धान खरीदी केंद्रों के प्रभारी और व्यापारियों के बीच कथित मिलीभगत का आरोप लगाते हैं। किसानों का कहना है कि इस गठजोड़ के कारण छोटे और वास्तविक किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।
छोटे किसान, जिनके पास 40, 50 या 100 क्विंटल तक धान है, उनके नाम से पंजीयन ही नहीं हो पा रहा। ऐसे किसान लगातार चिंता में हैं कि उनका धान समय पर खरीदा जाएगा या नहीं। कई किसानों ने बताया कि यदि धान लंबे समय तक घर में रखा रहे, तो नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है। ऊपर से परिवहन और भंडारण की मुश्किलें अलग।
किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ऐसे किसानों के लिए प्राथमिकता से स्लॉट बुकिंग की सुविधा मिले ताकि उन्हें रातभर मोबाइल पर जागने की मजबूरी न हो। साथ ही, पोर्टल को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की भी मांग की जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता की आशंका न रहे।
किसानों का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि खरीदी केंद्रों की निगरानी बढ़ाए, जिम्मेदार अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दे और यदि कहीं मिलीभगत पाई जाए तो कठोर कार्रवाई करे। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे किसानों की परेशानियों को समझना और समाधान करना आवश्यक है, क्योंकि वही खेती-किसानी की असली रीढ़ हैं।
कटनी जिले के किसान उम्मीद कर रहे हैं कि जिला प्रशासन उनकी आवाज़ सुनेगा और स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया को आसान व निष्पक्ष बनाएगा, ताकि किसी मेहनतकश किसान को अपने हक के लिए रातभर जागकर संघर्ष न करना पड़े।
हरिशंकर बेन


