कटनी जिले की रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वर्षों से जमे कर्मचारियों की मनमानी, स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। जिला पंचायत कटनी के वार्ड क्रमांक–9 की निर्वाचित सदस्य माला मौसी ने इस संबंध में कलेक्टर कटनी को लिखित शिकायत सौंपते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं उससे जुड़े ग्रामों में शासन द्वारा प्रदत्त स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ आम जनता को नियमानुसार नहीं मिल पा रहा है। इसका मुख्य कारण अनेक कर्मचारियों का पिछले 25 से 30 वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ रहना बताया गया है। लंबे समय से जमे ये कर्मचारी अपनी पदस्थापना का दुरुपयोग कर जिम्मेदारियों से विमुख होकर अवैध गतिविधियों में संलिप्त हैं।
माला मौसी द्वारा किये गए स्थल निरीक्षण एवं जनशिकायतों में यह तथ्य सामने आया है कि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, जननी सुरक्षा योजना की राशि भुगतान में खुलेआम लेन-देन किया जा रहा है। इन मामलों की खबरें पूर्व में समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अलावा अस्पताल में बिना मान्य डिग्रीधारी व्यक्ति से एक्स-रे कराए जाने जैसी गंभीर लापरवाही भी उजागर हुई है। महिला नशबंदी कैंपों में भी अनियमितताओं की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कड़ाके की ठंड के बावजूद जननी महिलाओं एवं सामान्य मरीजों को गर्म वस्त्र उपलब्ध नहीं कराए जाते, न ही शासन के निर्देशानुसार पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। अस्पताल परिसर के शासकीय क्वार्टरों को अवैध रूप से किराए पर देने का आरोप भी लगाया गया है। अधिकांश कर्मचारी मुख्यालय पर निवास नहीं करते और दोपहर 12 बजे के बाद अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारियों को रीठी अस्पताल में अटैच करने से संबंधित क्षेत्रों की जनता स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हो रही है।
माला मौसी ने मांग की है कि बीएमओ सहित वर्षों से जमे सभी कर्मचारियों को हटाकर उनकी मूल पदस्थापना में भेजा जाए, महिला चिकित्सक सहित आवश्यक डॉक्टरों की नियमित नियुक्ति की जाए और समस्त अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो। उन्होंने चेतावनी दी है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो जनता का शासकीय स्वास्थ्य व्यवस्था से विश्वास समाप्त हो जाएगा।
हरिशंकर बेन


