भोपाल में रविवार को सियासी और सामाजिक तापमान चरम पर पहुंच गया।
ब्राह्मण बेटियों को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में मध्य प्रदेश के आईएएस अधिकारी व अजाक्स प्रदेश अध्यक्ष संतोष वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर विप्र समाज सड़क पर उतर आया।
मुख्यमंत्री आवास घेरने निकले सैकड़ों प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने बल प्रयोग और वाटर कैनन का सहारा लिया, जिससे अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं।
🚨 पुलिस एक्शन: 60 गिरफ्तार
स्थिति बिगड़ते देख पुलिस ने करीब 60 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। सभी को पुलिस वाहनों में भरकर रातीबड़ क्षेत्र ले जाया गया, जहां प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत नोटिस देकर रिहा किया गया।
🔥 “आंदोलन खत्म नहीं हुआ” – विप्र समाज
विप्र समाज के नेताओं ने दो टूक कहा—
“यह आंदोलन अभी रुका नहीं है। सरकार का फैसला ही अगला कदम तय करेगा। अगर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र होगा।”
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें—
- संतोष वर्मा की तत्काल सेवा से बर्खास्तगी
- उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो
🚧 300 पुलिसकर्मी, चारों ओर बैरिकेडिंग
घेराव से पहले ही किलोल पार्क, पॉलिटेक्निक चौराहा, राजभवन तिराहा और रोशनपुरा में भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
सुबह 10 बजे से रोशनपुरा चौराहे पर जुटे प्रदर्शनकारी 11:30 बजे पैदल मार्च करते हुए मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़े।
हाथों में तिरंगा, भगवा ध्वज और काले निशान, बैनरों पर लिखा था— “बेटी का सम्मान नहीं तो समझौता नहीं”


