*”खुशियों की छिन्दवाड़ा/19 नवंबर 2025/ जिले के आदिवासी विकासखण्ड बिछुआ के ग्राम धनेगांव में रहने वाले श्री रविन्द्र मर्सकोले के घर 25 जून 2023 को एक प्यारी-सी बच्ची ने जन्म लिया। जन्म का क्षण तो खुशियों से भरा था, पर परिवार चिंतित भी था—क्योंकि बच्ची का जन्म कटे – फटे होंठ एवं तालू (क्लेफ्ट लिप एंड पैलेट) जैसी गंभीर जन्मजात विकृति के साथ हुआ था । इस कारण बच्ची को स्तनपान करने में कठिनाई हो रही थी और कुपोषण का भी खतरा बढ़ गया था।
इसी समय राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम-बी ने उम्मीद की किरण बनकर हर-घर की तरह इस घर में भी कदम रखा। टीम के मेडिकल ऑफिसर डॉ. बालगोविंद पन्द्रे व डॉ. निधि सूर्यवंशी और एएनएम श्रीमति कुसमा पहाड़े ने धनेगांव पहुंचकर बच्ची का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया। विकृति की गंभीरता को देखते हुए टीम ने तुरंत डी.ई.आई.सी छिंदवाड़ा रिफर किया, जहाँ प्राथमिक जांच के बाद बच्ची को उपचार के लिए पाढर अस्पताल बैतूल भेजा गया।
किंतु बच्ची का वजन कम होने के कारण डॉक्टरों ने ऑपरेशन छह महीने बाद करने की सलाह दी। परिवार ने हिम्मत नहीं हारी और आर.बी. एस.के टीम का निरंतर सहयोग मिलता रहा। फिर वह दिन आया जिसने इस परिवार की किस्मत बदल दी। 23 अक्टूबर 2024 को बच्ची के कटे – फटे होंठ का पहला ऑपरेशन पूरी तरह निःशुल्क और सफलतापूर्वक किया गया। जिसके बाद 27 अक्टूबर 2025 को दूसरा ऑपरेशन उसके कटे – फटे तालू का फिर से निःशुल्क और सफलतापूर्वक किया गया।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम ने समय-समय पर फॉलोअप किया और आज बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है। उसके चेहरे पर लौटी मुस्कान, न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे गाँव के लिए खुशी और आशा का संदेश बन गई है। इस उपचार के सफल संचालन में
कलेक्टर छिंदवाड़ा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, आर.बी.एस.के जिला नोडल अधिकारी डॉ. धीरज दावण्डे और खंड चिकित्सा अधिकारी बिछुआ डॉ. निलेश सिडाम का अमूल्य मार्गदर्शन रहा।
यह सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि एक परिवार में लौटी मुस्कान की कहानी है। आज यह नन्ही परी स्वस्थ है, खिलखिला रही है। उसके परिवार की खुशी उसी अनमोल मुस्कान में झलकती है, जो राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की सफलता की कहानी कहती है।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आर.बी.एस.के) भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत चलाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जो न केवल जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में पाई जाने वाली बीमारियों, विकृतियों एवं विकास संबंधी समस्याओं की पहचान करता है, बल्कि उपचार और प्रबंधन भी सुनिश्चित करता है। यह बच्चों की सेहत का संपूर्ण सुरक्षा कवच है, जो बीमारी की पहचान से लेकर इलाज तक सब कुछ निःशुल्क प्रदान करता है।
*संवाददाता शुभम सहारे छिंदवाड़ा*


