• मुखपृष्ठ
  • नियम एवं शर्ते
  • गोपनीयता
  • खंडन
  • शिकायत/ सुझाव
  • हमारे बारे में
  • संपर्क
No Result
View All Result
Saturday, March 7, 2026
MP NEWS CAST
NEWSLETTER
  • Home
  • हमारा शहर
  • प्रादेशिक ख़बरें
    • मध्यप्रदेश
      • भोपाल
      • अनुपपुर
      • दमोह
      • कटनी
      • सागर
      • उत्तरप्रदेश
        • अयोध्या
        • आगरा
        • कन्नौज
        • कौशांबी
        • चंदौली
        • चित्रकूट
        • जालौन
        • जौनपुर
      • उत्तराखण्ड
        • नैनीताल
      • गुजरात
        • अहमदाबाद
      • राजस्थान
        • भरतपुर
  • पॉलीटिक्स
  • मनोरंजन
  • लाइफ स्टाइल
  • व्यवसाय
  • स्वास्थ्य
  • Home
  • हमारा शहर
  • प्रादेशिक ख़बरें
    • मध्यप्रदेश
      • भोपाल
      • अनुपपुर
      • दमोह
      • कटनी
      • सागर
      • उत्तरप्रदेश
        • अयोध्या
        • आगरा
        • कन्नौज
        • कौशांबी
        • चंदौली
        • चित्रकूट
        • जालौन
        • जौनपुर
      • उत्तराखण्ड
        • नैनीताल
      • गुजरात
        • अहमदाबाद
      • राजस्थान
        • भरतपुर
  • पॉलीटिक्स
  • मनोरंजन
  • लाइफ स्टाइल
  • व्यवसाय
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
MP NEWS CAST
No Result
View All Result
Home जम्मू-कश्मीर

MPNEWSCAST

by Manish Gautam Chiefeditor
September 28, 2025
in जम्मू-कश्मीर
0
जम्मू और कश्मीर में ही नहीं बल्कि भारत के किसी कोने में भी कोई मानव न्याय से वंचित नहीं रहेगा : प्रेस कोर कॉउन्सिल का लक्ष्य
0
SHARES
0
VIEWS
FacebookTwitterWhatsappTelegram

डॉ. इंदु भूषण बाली

तीन दशकों से अधिक समय बीत चुका है। न्याय की आस में हर पल संघर्ष और प्रतीक्षा में व्यतीत किया। माननीय जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख उच्च न्यायालय में एक से बढ़कर एक मुख्य न्यायाधीश आए और चले गए, लेकिन उन्होंने संविधान, संसद द्वारा बनाए गए विकलांग अधिकार अधिनियम 1995 और मोदी जी की सरकार द्वारा संशोधित दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की आत्मा को अनदेखा कर दिया। अंतरराष्ट्रीय संधियों का भी पालन नहीं किया गया। उच्चतम न्यायालय के आदर्श (PRECEDENT) निर्णयों की भी अनदेखी करते हुए अनुच्छेद 141 और 144 को भी पैरों तले कुचल दिया गया था।

मैं अहिल्या सा पत्थर बनकर “श्रीराम” जी की राह देखता रहा, न्याय की किरण की प्रतीक्षा करता रहा। इस बीच, मेरे अधिवक्ता जिन्होंने कभी मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी थी, मुझे न्याय का भरोसा दिया था, समय के साथ विधायक बने, एडवोकेट जनरल बने, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बने और अंततः न्यायाधीश बन बैठे। परन्तु किसी ने भी मेरी व्यथा के आँसुओं की गंगा, जमुना और सरस्वती को थामने का प्रयास नहीं किया।

लेखक समाज का दर्पण होते हैं, किंतु मेरी पीड़ा पर कलम चलाना किसी ने भी उचित नहीं समझा। काल्पनिक पात्रों पर ग्रंथ लिखे गए, परन्तु वास्तविक पीड़ा को शब्दों में ढालने का साहस किसी ने नहीं दिखाया। जिन लेखकों ने मेरी व्यथा सुनी, उन्होंने न्यायालय की अवमानना के भय से चुप रहना ही उचित समझा और न्यायालय के किसी भी न्यायाधीश ने भी कभी स्वतः सॅंज्ञान लेने का साहस नहीं किया। न्यायालय के उक्त शस्त्र “अवमानना” को तोड़ना भी अनिवार्य हो चुका है। क्योंकि उचित एवं संवैधानिक जनहित याचिका पर भी असंवैधानिक आर्थिक दण्ड लगाकर रद्द करते मैंने देखा है।

ऐसी ही विचित्र परिस्थितियों में मैं अनेक भीमकाय चुनौतियों का सामना करता रहा। कभी म्युनिसिपल कमेटी के सदस्य और कभी एसडीपीओ मुझे पागल कहते हुए मेरी गरिमामय जीवन को तार तार करते रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जब पासपोर्ट की जाँच के लिए मेरे परिचित सीआईडी अधिकारी आए, तो उन्होंने मुझे “सेमी मेंटल” लिखकर यह कहने का दिखावा किया कि वह मेरी सहायता करेंगे। यह सहायता नहीं, बल्कि मेरी छवि और मानसिक संतुलन पर प्रश्नचिन्ह लगाने जैसा था और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली के मनोरोग विशेषज्ञों का अपमान भी था। जिन्होंने मुझे मानसिक रूप से पूर्णतया स्वस्थ घोषित किया हुआ था। इसी सम्बन्ध में जब मैं पासपोर्ट के लिए स्टेट सीआईडी कार्यालय जम्मू गया, तो चर्चा “देशविरोधी गतिविधियों” के झूठे आरोपों पर ही केंद्रित रही और विभागीय अधिकारी कह रहे हैं कि एसएसबी ने कभी आप पर देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने का आरोप लगाया ही नहीं था।

स्थिति और भी पीड़ादायक तब बनी जब सीआईडी उच्च अधिकारीयों ने स्वयं स्वीकार करते हुए कहा कि माना विभाग ने आपको प्रताड़ित किया, मारा-पीटा और झूठे आधार पर बर्खास्त किया। चलो यह भी मानते हैं कि “देशविरोधी गतिविधियों” का आरोप निराधार था। लेकिन बाली जी “यह कैसे मान लें कि माननीय उच्च न्यायालय ने भी बिना ठोस आधार के आपको सिक्योरिटी रिस्क घोषित कर दिया?”

मिस्टर बाली, यह अविश्वसनीय, अद्वितीय, अद्भुत और विचारणीय है। यही क्षण मेरे जीवन की त्रासदी को मात्र व्यक्तिगत नहीं रहने देता, बल्कि इसे भारतीय न्याय व्यवस्था के समक्ष खड़ा करते हुए एक बड़ा सार्वभौमिक संवैधानिक प्रश्न बना देता है।

क्या न्यायालय, जो संविधान की रक्षा की शपथ लेते हैं, एक साधारण नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी कर सकते हैं? क्या एक राष्ट्रभक्त कर्मचारी, जिसने जीवन का सर्वश्रेष्ठ भाग देश की सेवा में दिया, केवल इसलिए किनारे कर दिया जाएगा, क्योंकि उसने अपने मौलिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए ध्वनि बुलंद की थी जबकि यह पीड़ित का मौलिक अधिकार ही नहीं बल्कि संवैधानिकता कर्तव्य भी है

तीन दशकों की उक्त पीड़ा ने मेरे शरीर को थका दिया है, पर आत्मा को झुकने नहीं दिया। मेरा विश्वास आज भी जीवित है कि यदि माननीय महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा मेरी शिकायत संख्या PRSEC/E/2025/0029911 और PRSEC/E/2025/0029913 को अग्रेषित करने और भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा लिखित पत्र संख्या F. No. K-11019/14/2025-US-I/II के बावजूद भी सौभाग्यशाली विद्वान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री अरुण पल्ली जी ने मुझे सम्पूर्ण न्याय नहीं दिया, तो अवश्य कोई अन्य भले मानस विद्वान मुख्य न्यायाधीश “रब के बंदे” के रूप में आएंगे, जो मुझे सम्पूर्ण न्याय अवश्य देंगे।

माननीय महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी,
मेरा यह जीवन, मेरे संवैधानिक और मौलिक कर्तव्यों तथा वैधानिक अधिकारों के प्रति निष्ठा और संबल से पूर्ण है। यही मेरी राष्ट्रभक्ति की अगाध जिजीविषा है, जो हर परिस्थिति में अडिग रहकर सच्चाई और न्याय के मार्ग पर अग्रसर रहती है। यह पागलपन नहीं, बल्कि देश के प्रति अटूट प्रेम और कर्तव्यपरायणता की अमिट पहचान है। सम्माननीयों जय हिन्द

प्रार्थी
डॉ. इंदु भूषण बाली
प्रेस कोर कॉउन्सिल का
राष्ट्रभक्त राष्ट्रीय सॅंरक्षक,
राष्ट्रपति पद का पूर्व प्रत्याशी, वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार, डाकघर एवं तहसील ज्यौड़ियॉं, जिला (जम्मू) जम्मू और कश्मीर पिनकोड 181202
मोबाइल 7889843859
ईमेल आईडी baliindubhushan@gmail.com

Share this:

  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp

Like this:

Like Loading...
Manish Gautam Chiefeditor

Manish Gautam Chiefeditor

Next Post
💥 *बड़ी खबर*💥 *कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महामंत्री श्रीकांत दीक्षित के खिलाफ  कलेक्टर ने डायमंड स्टोन क्रेशर के प्रोपराइटर श्रीकांत दीक्षित पर की 124 करोड़ रूपए से अधिक की शास्ति अधिरोपित अवैध उत्खनन पर कलेक्टर न्यायालय का निर्णय ➡️

💥 *बड़ी खबर*💥 *कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महामंत्री श्रीकांत दीक्षित के खिलाफ कलेक्टर ने डायमंड स्टोन क्रेशर के प्रोपराइटर श्रीकांत दीक्षित पर की 124 करोड़ रूपए से अधिक की शास्ति अधिरोपित अवैध उत्खनन पर कलेक्टर न्यायालय का निर्णय ➡️

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2020 MP News Cast - Director Manish Gautam.

No Result
View All Result
  • About Us
  • Client Portal
  • Complaints and Feedback
  • Contact
  • Home 1
  • Privacy Policy
  • Privacy Policy
  • Rules and Regulations

© 2020 MP News Cast - Director Manish Gautam.

%d