स्वास्थ्य केंद्रों पर समुचित व्यवस्थाएं रहे और इसकी जिम्मेदारी ऐसे चिकित्सक को दी जाएl जो नियमित रूप से विभाग में शासकीय सेवाएं दे रहा हो l
जिसको लेकर आज आपको कटनी जिले की रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की अचंभित कर देने वाली हकीकत की दास्तान कहानी की शुरूआत होती है, तत्कालीन रीठी खंड चिकित्सा अधिकारी रहे l डॉक्टर सुनील पाराशर के समय से……….

आपको ज्ञात होगा कि दिनांक 22/12/2020 को डॉक्टर सुनील पाराशर का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ढीमरखेड़ा,ब्लॉक उमरियापान में स्थानांतरित होने के बाद रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का प्रभार एक संविदा कर्मचारी बबीता सिंह को सौंप दिया जाता है । वही सामान्य प्रशासन विभाग म.प्र. शासन द्वारा जारी स्थानांतरण नीति वर्ष 2021-22 के परिपालन में शासन स्तर से प्रशासकीय अनुमोदन प्राप्त कर 30 डॉक्टरों के प्रशासकीय कार्य सुविधा की दृष्टि से तत्काल प्रभाव से दिनांक23/08/2021 को आगामी आदेश तक,अस्थाई उल्लेखित संस्था से स्थानांतरित किया गया था। जिसमे 20 वे नंबर पर डॉक्टर बी.के. प्रसाद को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मानपुर जिला उमरिया से, रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला कटनी में स्थानांतरित किया गया है । लेकिन स्थानांतरित निर्देशों का जिले में पालन नहीं किया जा रहा है l बल्कि मध्यप्रदेश शासन के निर्देशों को दरकिनार कर डॉक्टर बी.के. प्रसाद को रीठी स्वास्थ्य केंद्र का प्रभार नहीं दिया गया ।और रीठी सीएचसी मैं पदस्थ डॉक्टर बी. के. प्रसाद, जो अपनी स्वास्थ्य सेवाए पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ दे रहे थे। वह पदस्थ कर्मचारियों को राश नहीं आया और उन्हे राजनीति के चलते दिनांक 17/06/2022 को प्रशासकीय कार्य सुविधा का हवाला देते हुए मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी कटनी द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उमरियापान का प्रभार तत्काल प्रभाव सौंप दिया जाता हैं।
इस दौरान डॉक्टर बबीता सिंह ही प्रभार पर रही l और रीठी जो राजनीति से भरी पड़ी है उसकी विडंबना देखिए कि एक संविदा कर्मचारी को प्रभार सौंप दिया जाता है,लेकिन यहां एक सच्चे ईमानदार सीनियर डॉक्टर की यहां किसी को जरूरत ही नहीं है l इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं कि आखिर उन्हें स्थानांतरित करने का कारण क्या रहा होगा,,,,,?
हमेशा से सवालों के घेरे में रहे रीठी समुदाय स्वास्थ्य केंद्र को अब मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा दिनांक 20/6/2023 को डॉ मेघेंद्र श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव सौंप दिया जाता हैं। और एक ऐसे डॉक्टर को जिम्मेदारी सौंप दिया जाता हैं। जो अपनी जिम्मेदारी मुख्यालय मैं न रहकर निभा रहे है । जबकि बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) को मुख्य रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ( सीएचसी) में पदस्थापित किया जाता है, जहां वे मरीजों की जांच करते हैं, प्रबंधन की बैठकों में भाग लेते हैं और अस्पताल प्रबंधन देखते हैं। सीएचसी, स्वास्थ्य सेवा का एक महत्वपूर्ण स्तर है जो प्राथमिक और उप-जिला अस्पतालों को जोड़ता है। बीएमओ का काम सीएचसी के साथ-साथ उससे जुड़े प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और उप-स्वास्थ्य केंद्रों में भी फैला होता है।
बीएमओ सीएचसी में रहकर अपनी सेवाएं देते हैं, लेकिन उनका कार्य क्षेत्र सीएचसी से आगे बढ़कर पीएचसी और उप-स्वास्थ्य केंद्रों तक फैला होता है, जिससे वे स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी ढंग से संचालित करते हैं ।
उसके बावजूद भी वर्तमान अस्पताल प्रबंधक की कार्यप्रणाली इतनी बेहतर है कि मरीजों को मूलभूत सुविधाओं एवं अव्यवस्थाओं को लेकर नाकाम साबित हो रही है ।जिसको लेकर ग्रामीणों की मांग है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रीठी में शासन के निर्देशानुसार मूल पदस्थापना हुए चिकित्सा अधिकारी को यहां का प्रभार सौंपा जाए । ताकि विभाग की चरमराई हुई व्यवस्था को सही कर ग्रामीणों को स्वस्थ स्वास्थ्य सुविधाए में मिल सके ।
इनका कहना है
डॉ बी.के प्रसाद चिकित्सा अधिकारी के पद पर रीठी स्थानांतरण हुआ था,जिन्हे उमरियापान में डॉक्टर पूर्ति हेतु भेजा गया था,।
मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी
डॉ राजेश सिंह ठाकुर
हरिशंकर बेन


