स्वास्थ्य केंद्र में गंदगी का आलम एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि यह मरीजों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ाता है. अस्पताल परिसरों में कचरे के ढेर लगे होते हैं, कूड़ेदानों से कचरा फैला होता है, और बदबू आती है, तथा आवारा पशु घूमते हैं. यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित करती है और रोगियों को स्वच्छ व स्वस्थ वातावरण मिलने से रोकता है ।
परंतु इन सब बातों से अस्पताल प्रबंधक को कोई फर्क नहीं पड़ता। और उनकी कार्यप्रणाली से कटनी जिले का रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाली के आंसू बहा रहा है ।
जहां सैकड़ो की संख्या में 56 ग्राम पंचायतों के मरीज रोजाना अपना इलाज कराने पहुंच रहे हैं वहीं डॉक्टर साहब का अस्पताल में ना होना भी एक बड़ी समस्या का विषय है।
यहां चारों तरफ गंदगी का आलम पसरा हुआ है जगह जगह गाय के गोबर डाले हुए हैं जिसे देख यह अस्पताल की जगह गौशाला प्रतीत होती है l
भर्ती मरीजों के आसपास इतनी ज्यादा गंदगी फैली हुई है कि उसकी दुर्गंध से मरीज परेशान है । ऐसी स्थिति में मरीज स्वस्थ होने की जगह और संक्रामक बीमारियों के घेरे में आ रहे है ।
वही लोगो का कहना है इससे पूर्व मैं जो बीएमओ थे उनके कार्यकाल में ऐसी अस्पताल की दुर्दशा नहीं थी ,जो अब है। क्योंकि पहले हर एक भर्ती मरीज को बेडशीट दी जाती थी परंतु अब नहीं । बताया जाता है कि कपड़ा धोने वाले व्यक्ति का वर्षों से अभी तक भुगतान भी नहीं किया गया है । वही अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर महीनो से सीसीटीवी कैमरे जो बंद पड़े हैं उन्हें भी तक चालू नहीं किया गया ।
जिससे कारण यहां पर ड्यूटी पर तैनात नर्स डरी सहमी हुई ,अपनी सेवाएं देने को मजबूर है। यहां कौन कब आ रहा है कब जा रहा है किसी को कोई डर नहीं है । मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी को भी रीठी सीएचसी की ओर विशेष रुझान समझ मैं नही आ रहा है। जिसका खमीजा बेचारी आम जनता भुगत रही है ।
हरिशंकर बेन


