रीठी विकासखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जहाँ एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए सैकड़ो की योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर रीठी CHC में मरीजों को मूलभूत दवाएं तक नहीं मिल रही हैं। CHC में पदस्थ दो फार्मासिस्टों की उपस्थिति के बावजूद दवा भंडार में ताला लगा हुआ है, और हाजिरी रजिस्टर पर कई दिनों से फार्मासिस्टों के हस्ताक्षर तक दर्ज नहीं हैं।
सूत्रों के अनुसार, सामुदा
यिक स्वास्थ्य केंद्र में फार्मासिस्टों के लिए अलग से दवा भंडारण कक्ष (स्टोर रूम) उपलब्ध है। यह कक्ष हमेशा खुला रहना चाहिए ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर दवा मिल सके। लेकिन यहां स्थिति विपरीत है — दवा कक्ष पर अक्सर ताला लटका रहता है, और मरीज लाइन में लगकर घंटों इंतजार करने के बाद खाली हाथ लौट जाते हैं।
अस्पताल में दो फार्मासिस्ट नियुक्त हैं, जिनका कार्य है — शासन द्वारा निर्धारित 373 आवश्यक दवाओं का संधारण करना, वितरण और रिकॉर्ड रखना। परंतु रजिस्टर के निरीक्षण में यह पाया गया कि पिछले कई दिनों से न तो इन फार्मासिस्टों की उपस्थिति दर्शाई गई है और न ही उनके हस्ताक्षर दर्ज हैं।
स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 373 प्रकार की आवश्यक दवाएं हमेशा उपलब्ध रहनी चाहिए, जिससे हर प्रकार के प्राथमिक व सामान्य रोगों का उपचार किया जा सके। लेकिन रीठी CHC में मरीजों को सिर्फ 8 से 10 सामान्य दवाएं ही दी जा रही हैं — जैसे कि पैरासिटामोल, सिट्राजिन, ORS, और आयरन की गोलियां। बाकी ज़रूरी दवाएं जैसे ऐंटीबायोटिक्स, हृदय रोग की गोलियां, बच्चों की कफ सिरप और महिलाओं की विशेष दवाएं उपलब्ध ही नहीं हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दवाओं का वितरण फार्मासिस्ट की मौजूदगी में भी डीडी सपोर्टर स्टाफ कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मरीजों के जीवन से भी खिलवाड़ है। फार्मासिस्ट के बिना दवाओं का वितरण कानूनन गलत है, क्योंकि हर दवा की खुराक और उपयोग की सही जानकारी सिर्फ प्रशिक्षित दवा वितरक (फार्मासिस्ट) ही दे सकता है। स्थानीय सूत्रों और कुछ कर्मचारियों की माने तो “एथनिक योजनाओं के तहत मिलने वाली दवाओं” का गुपचुप तरीके से दुरुपयोग किया जा रहा है। दवाओं की कथित रूप से ब्लैक मार्केटिंग होने की भी संभावना जताई जा रही है। दवाओं की आपूर्ति और वितरण के लिए फार्मासिस्टों को नियमित रूप से स्टॉक रजिस्टर, मरीज पर्ची और वितरण स्लिप का संधारण करना होता है। जिसकी अस्पताल प्रबंधन को जानकारी होने बाद भी उनके द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नही की जा रही है ।
इनका कहना है,,।
दवाइयां का वितरण नियमानुसार फार्मासिस्ट को ही करना चाहिए,,l डी.डी. सपोर्टर स्टाफ साथ में रह सकता है और
यदि ऐसा है तो उसकी जांच कराई जाएगी ।
मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी
डॉक्टर राज सिंह ठाकुर,,
हरिशंकर बेन

