हिंदू धर्म मैं गौ माता की सेवा करना एक पुण्य कार्य माना जाता है । लेकिन जब इस सेवा को भी भ्रष्टाचार का चारा बना दिया जाए, तो सवाल उठना लाजमी है, आखिर कौन हैं वो लोग,जो गोसेवा की आड़ में लाखो रुपए का बंदरबांट कर रहे हैं? हम बात कर रहे हैं कटनी जिले की रीठी जनपद पंचायत
से महज एक किलोमीटर की दूरी मैं बनी घनिया ग्राम पंचायत द्वारा संचालित ब्रजधाम गौशाला की,जहा रिकॉर्ड के मुताबिक 24 अक्टूबर 2024 को 153 मवेशियों की संख्या सरपंच द्वारा प्रमाणित किया गया था । उसके बाद पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा 4 अप्रैल 2025 को 110 मवेशियों की संख्या दर्ज की गई थी। वही 1 महीने बाद यानेकी 7 मई को जब चिकित्सा अधिकारी द्वारा निरीक्षण किया जाता हैं। तो पशुओं की संख्या सिर्फ 35 ही पाई जाती है।अब सोचने वाली बात यह है कि मवेशियों की संख्या काम क्यों हो रही है। आखिर एक महीने में 75 मवेशी कहा गायब हो गए । इसका कोई रिकार्ड मौजूद नहीं।
वही ग्रामीणों ने बताया कि इस गौशाला में गौशाला के नाम पर मवेशियों का व्यापार चल रहा है आवारा मवेशियों को गौशाला में लाकर उनसे व्यापार किया जा रहा है । वही गौशाला संचालकों द्वारा पैसे का खेल इस तरह खेला जा रहा है कि 4 कर्मचारियों में हाकुम सिंह,नबल सिंह, इंदू सिंह,और सप्तार खान को 200/रुपए प्रतिदिन के हिसाब से रखा गया है। परंतु सप्तार खान आकेले ही 2 हजार रुपए महीने में अपनी गौ सेवाए देने मैं कोई कसर नहीं छोड़ रहे है । बाकी तीन लोगों में शासन की राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। वही किसी कारण वस बाद में इन तीनों को हटाकर रामस्वरूप, विनोद और राजू चौधरी का नाम रजिस्टर में दर्ज कर लिया जाता है । गौशाला में गायें भूखी मर रही हैं। पर लाखों रुपए का भूसा का बिल लगाकर यहां के कर्मचारी डकार रहे हैं ।
अब सोचने वाली बात यह है कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो, गौ वंशो की रक्षा कैसे होगी ,और गौशाला खोलकर,गौ वंशो की रक्षा का ढिंढोरा पीटने से क्या फायदा l
हरिशंकर बेन


