कालापीपल(बबलू जायसवाल)इन दोनों खेती किसानी का काम जोड़ों पर चल रहा है,इस समय किसानों को डीएपी खाद की फसल के लिए सख्त जरूरत है,ऐसे में कालापीपल क्षेत्र सहित प्रदेश में किसान खाद के लिए परेशान हो रहा हैं,जो डीएपी खाद 1846 किसान सोयाबीन की डालते हैं,वही खाद किसानों को सोसाइटीयो में नहीं मिल पा रहा है,उसकी जगह सोसाइटी वाले किसानों को इफको (123216) ओर (102626) 1720 रुपए का खाद किसानों को दिया जा रहा है,कारण यह है कि इस बार सोसाइटी में”डीएपी”खाद नहीं आया जो खाद स्टॉक में रखा है वही खाद किसानों को दिया जा रहा है, वही दूसरी ओर मार्कफेड में डीएपी खाद किसानों को नगद 1350 रुपए मे दिया जा रहा है,मध्य प्रदेश सरकार दोहरा मापदंड समझ से परे है, सोयाबीन की फसल में डीएपी खाद का उपयोग करता है,मगर जो खाद गेहूं की फसल में उपयोग की जाती है, वहां “इफको”कम्पनी की खाद सरकार सोसाइटीयो के माध्यम से बंटवा रही है,जो किसान सोयाबीन की फसल बोता है उसको 123216 एवं 102626 खाद दिया जा रहा है, जो किसान के लिए किसी भी काम का नहीं है,वही किसानों को सोसाइटी से बिना पैसे दिए मिल जाता था,डीएपी खाद मिल जाता था अब उसी खाद के लिए किसानों को मार्कफेड से 1350 रुपए में नगदी लेने को किसान मजबूर है,किसान हर तरफ से लूट रहा है,वही खाद बीज दुकान वाले उनको एक्सपायरी डेट की दवा देकर उनको लूट लेते हैं, वही बाजार में डीएपी ₹1500 बोरी में व्यापारी खुलकर बेंच रहे हैं।अब सवाल यहां उठता है कि व्यापारियों के पास डीएपी खाद आखिर आता कहां से है,और सरकार के पास खाद नहीं है यहां कैसी विडंबना ?


