रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। जनकल्याणार्थ किसान समृद्धि श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ पंचम दिवस वैशाख शुक्ल एकादशी की परम पावन बेला में प्रातः कालीन सत्र में यज्ञशाला में समस्त देवताओं की पूजन के उपरान्त श्री लक्ष्मी नारायण भगवान के अभिषेक के साथ यज्ञ का आयोजन यज्ञाचार्य पंडित अजय दुबे जी के द्वारा उपस्थित यजमानों को यज्ञ में स्थापित देवी देवताओं के पूजन का महत्व बतलाया गया। यज्ञ चरणानुराज्ञी पंडित रोहित दुबे ने बताया कि लक्ष्मी नारायण यज्ञ में आज नगर के वरिष्ठ कर्मकांड ज्योत से पुराण प्रवक्ता ब्राह्मणों का आगमन हुआ जिसमें आचार्य पंडित दीनबंधु दुबे,आचार्य पंडित अशोक दुबे,नागेश्वर मंदिर पंडित चंद्रशेखर पुरोहित,पंडित संजय दुबे जी सहित अनेकानेक ब्राह्मण देवताओ का आगमन हुआ। यज्ञ संयोजक पंडित अखिलेश दुबे ने बताया कि श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ आयोजन के पांचवे दिन प्रवचन में परम
पूज्य स्वामी चंद्रशेखरानंद गिरि जी महाराज एवं परम पूज्य स्वामी जितेंद्रियानंद सरस्वती जी ने उपस्थित श्रोताओं को यज्ञ की महिमा को श्रवण कराया संतों ने कहा कि धर्म का श्रेष्ठता पूर्वक पालन करना ही धार्मिकता है।धर्म करना मतलब यज्ञ करना, कर्म अनुष्ठान से भगवान प्रसन्न होते हैं। पांच प्रकार के पाप व्यक्ति के द्वारा नित्य होते हैं। ज्ञात अज्ञात रूप से प्रातः काल उठते ही बिस्तर से नीचे पैर रखते ही छोटे-छोटे कीटाणु आपके पैर में दब कर मर जाते हैं। झाड़ू लगाते समय छोटे-छोटे जीव चीटियां आदि मृत्यु को प्राप्त होती है। आटे पीसने पर भी कीड़े की मृत्यु हो जाती है लीपापोती करने पर चलते-फिरते कीड़े- मकोड़े मरते हैं इन पंचपापकर्म की मुक्ति के लिए पंच महायज्ञ का कार्य शास्त्र में बताया है । ब्रह्म यज्ञ,देव यज्ञ,पितृ यज्ञ,भूत यज्ञ,की अतिथि यज्ञ,गीता में भी दसवें अध्याय में यज्ञों का विशेष रूप से वर्णन कीया है। ग्रहस्थ जीव का मुख्य कर्तव्य है कि वह माता-पिता गुरु की सेवा करें यह भी एक यज्ञ ही है। मन का वास्तविक स्वभाव शांत है परंतु संस्कार रूपी पत्थर जब मन रूपी समुद्र में पड़ता है,तब मन चंचल होता है,संस्कारों से जीव बना हुआ है,अच्छे संसार जब आते हैं तो व्यक्ति सबका भला सोचता है। रजोगुणी संस्कार और तमोगुण संस्कार व्यक्ति के विवेक को खत्म कर देते हैं कल्प कल्पांन्तर से मन को शांत ही माना है परंतु व्यक्ति के संस्कार विचार ही उसके मन को चंचल बनाते हैं। इसलिए श्रेष्ठ चिंतन रखें,श्रेष्ठ विचार रखें,श्रेष्ठ संस्कारित व्यक्ति के साथ रहें और श्रेष्ठ यज्ञ करते रहे, जप भी एक यज्ञ ही है। यजमान परिवार मधुसूदन गौर,श्रीमती निशा गौर, अजय मिश्रा,वंदना मिश्रा, कमलेश मिश्रा,श्रीमती अर्चना मिश्रा,संतोष गौर,श्रीमती संजना गौर,श्रीमती मनीषा गौर, सौभांगिनी स्वामी,नरेंद्र राठौर, श्रीमती निशा राठौर,श्रीमती लक्ष्मी राजपूत,श्रीमती प्रभा गौर, गोविंद पाल,सुरेश चंद्र रघुवंशी, श्रीमति विद्या रघुवंशी,राम शंकर गौर,श्रीमति आशा गौर, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप चौबे,श्रीमती रीना चौबे,त्रंबकेश्वर सिंगर, धनंजय उपाध्याय,श्रुति पूर्णिमा उपाध्यक्ष,संजय उपाध्याय, समिति अरुण उपाध्याय,अशोक कुमार साहू,श्रीमती लक्ष्मी साहू, आशुतोष शर्मा,ओम प्रकाश रघुवंशी,सुधा रघुवंशी, प्रतिभा रघुवंशी,सरोज राय,अनिता राय, सुरेश चंद्रवंशी,विद्या रघुवंशी, कन्हैयालाल सरपंच,नमन तिवारी पुनीत मिश्रा घनश्याम भैया, भूपेंद्र सिंह,मुकेश रिछारिया, सुभाष बरेली की श्रीमती शिप्रा ठाकुर आदि ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ अर्जित किया । प्रातः सत्र में यज्ञ का समय प्रातः 7:00 बजे से 11:00 तक एवं प्रवचन का समय शाम 6:00 से रात्रि 8:00 बजे तक होंगी।


