रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम//अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर समाज में पारिवारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए कुछ अलग हटकर अपने कर्तव्यों के साथ ही दूसरों के लिए उनके सुख-दुख में खड़े रहने और उनके उद्धार के लिए काम करने वाली महिलाओं की बात भी होती है। जिन्होंने अपने परिवार के साथ ही समाज सुधार और समाज को एक नई दिशा देने का कार्य करने वाली महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर याद किया जाता है। ऐसी नारियां जो हर चुनौती पूर्ण कार्य को करने में सक्षम होते हुए समाज के लिए प्रेरणा का कार्य करती हैं। ऐसी है एक जुझारू सुशिक्षित,सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारिता से जुड़ी हुई महिला पत्रकार सीमा कैथवास नर्मदापुरम की हम बात कर रहे हैं। जिनकी शैक्षणिक योग्यता एमएससी कंप्यूटर साइंस,बीएड एम ए सोशल वर्क, जर्नलिज्म, एलएलबी के साथ समजकार्य पीएचडी शोधार्थी भी हैं। आपके द्वारा पत्रकारिता के साथ ही समाज सेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया जा रहा है। जरूरतमंद और गरीब लोगों की यथासंभव मदद की जाती है उन्हें कानूनी सलाह दी जाती है जिससे उन्हें न्याय मिलने में सुलभता प्रदान होती है। समाज सुधार के लिए भी पत्रकारिता के माध्यम से आवाज उठाई जाती है और उसे एक दिशा देने का प्रयास किया जाता है । जरूरतमंदों को और ऐसे लोगों को जागरूक करने का काम भी करती हैं। आपसे निश्चित ही समाज को एक नई दिशा मिलती है और नारी शक्ति को एक ताकत और ऊर्जा भी प्रदान करती हैं आप। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सीमा के कैथवास का कहना है कि महिलाओं को शिक्षित होना अति आवश्यक है और महिलाओं को अपने मौलिक अधिकार की जानकारी होना चाहिए जिससे आवश्यकता पड़ने पर अपने हक के लिए महिलाये लड़ सके। महिलाएं राष्ट्र के सामाजिक और आर्थिक विकास की बुनियाद है यदि हमें देश का आर्थिक विकास करना है तो महिलाओं को घर से बाहर निकाल कर नेतृत्व भी करना होगा । यदि हमें राष्ट्र की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है तो हमें साक्षरता दर बढ़ानी होगी जिससे की छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर उचित नौकरी पा सके और देश के आर्थिक विकास में अपना योगदान दे सकेंगे ।भारतीय संविधान में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी बराबर मौलिक अधिकार है इसमें शिक्षा का अधिकार, स्वास्थ्य सेवा का अधिकार , काम करने का अधिकार, राजनीति में भाग लेने का अधिकार और सम्मान के साथ जीने का अधिकार शामिल है । अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मेरा मानना है कि इस महिला दिवस पर हम भारत में महिलाओं के बुनियादी अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाएं और उन्हें जागरूक करें जिससे वह भी देश के विकास में अपनी भागीदारी निभा सकेंगी। और जैसे 2023 में महिला दिवस का विषय था डिजिटल लेगिंग समानता के लिए प्रौद्योगिकी और नवाचार । इस साल 2024 में महिला दिवस की थीम “इंस्पायर इंक्लूजन” है, जिसका अर्थ होता है एक ऐसी दुनिया जहां हर किसी को बराबर का हक और सम्मान मिले। मैं आपको बताना चाहूंगी कि इस थीम पर मुझे काम करने में पहले से ही खुशी मिलती रही हैं। पत्रकार सीमा कैथवास का कहना है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनने के लिए शासन की बुनियादी योजनाओं का लाभ लेना चाहिए और उनकी स्वरुचि अनुसार लघु घरेलू कार्यों के साथ ही वह साइड में सिलाई मशीन, कुकिंग, बेकिंग जैसे अन्य दूसरे माइक्रो उद्योग से स्वरोजगार जैसे कार्यों से भी स्वरोजगार हासिल कर सकती हैं और आर्थिक रूप से सक्षम हो सकती हैं। आज डिजिटल क्रांति के युग में कंप्यूटर के जरिए कई ऐसे कार्य हैं जिन्हें आप सिस्टम पर बैठकर ही ऑनलाइन जॉबवर्क से आर्थिक रूप से सक्षम हो सकती हैं। और देश को आर्थिक सहयोग प्रदान कर हम देश को आत्मनिर्भर बनाने की परिकल्पना साकार करने में अपना योगदान दे सकते हैं । गांव में भी जो महिलाएं कौशल युक्त हैं उन्हें कार्य कुशलता में दक्ष करने की आवश्यकता है चूंकि किसी भी समाज की उन्नति उस समाज की महिलाओं की उन्नति से मापी जा सकती है इसलिए महिला दिवस 2024 की थीम हमें “इंस्पायर इंक्लूजन” और अपने हक और समानता को प्रदर्शित करने के लिए रहेगा। जिसे हम सभी महिलाओं को जानना होंगा।


