रिपोर्टर राजकुमार ठाकुर
सिवनी : सहकारिता विभाग व किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के निर्धारित मापदंडों के तहत सहकारी समितियों को नगद राशि लेकर खाद विक्रय का अधिकार नही है। सहकारी समितियों से मात्र परमिट के आधार पर किसानों की माँग व उनकी कृषि भूमि की पात्रता अनुसार ही खाद 0 प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को उपलब्ध कराई जाती है समितियों के पास मार्कफेड के माध्यम से ही खाद आती है उन्हीं खाद को समितियों द्वारा पीओएस मशीन में फिंगर लेकर किसानों को दी जाती है।मध्यप्रदेश सहकारी समिति महासंघ के जिलाध्यक्ष वंशी ठाकुर द्वारा बताया गया कि ऐसे किसान जो की सहकारी समितियों से लेनदेन नही करते या किसी अन्य किसान की भूमि ठेके पर लेते है इन किसानों द्वारा सहकारी समितियों में अनावश्यक दवाब बनाकर नगद राशि के माध्यम से खाद की माँग की जाती है जब सहकारी समितियों के प्रबंधक / खाद प्रभारी द्वारा इनको नगद खाद देने से मना कर दिया जाता है तो पहले तो ये समिति कर्मचारियों से अभद्रता पर उतारू हो जाते है फिर इनके द्वारा ब्लैकमेलिंग की दृष्टि से तमाम प्रकार के झूठे आरोप प्रत्यारोप सहकारी समितियों पर लगाकर वरिष्ठ अधिकारियों को झूठी शिकायत वर्तमान में की जा रही है जिससे सहकारी समिति कर्मचारियों को बहुत ज्यादा मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।


