नर्मदापुरम/जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर की बेटी अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज श्रेया अग्रवाल ने शानदार प्रदर्शन करते आइएसएसएफ वर्ल्ड निशानेबाजी चैंपियनशिप में भारत के लिए कांस्य पदक जीतकर एक बार फिर देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया हैं।काहिरा (मिस्र) में आयोजित ISSF विश्व चैंपियनशिप में भारत की प्रतिभाशाली निशानेबाज श्रेया अग्रवाल ने 10 मीटर एयर राइफल टीम इवेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया।
श्रेया ने इस प्रतियोगिता में एलेवेनिल वालारिवन और मेघना सज्जनार के साथ टीम बनाकर भाग लिया। तीनों भारतीय शूटरों ने उत्कृष्ट तालमेल और सटीक निशानेबाजी का प्रदर्शन करते हुए टीम को तीसरा स्थान दिलाया। अंतरराष्ट्रीय शूटर श्रेया अग्रवाल नर्मदापुरम के वरिष्ठ पत्रकार राजीव अग्रवाल की भांजी हैं। मिस्र में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में शूटर श्रेया को मिली इस सफलता पर नर्मदापुरम की पत्रकार डॉ. सीमा कैथवास ने बताया कि श्रेया ने संघर्षों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम गौरवान्वित किया है। श्रेया ने संघर्षों को पीछे छोड़ कर यह जीत हासिल की हैं। अवगत हो कि 25 साल की राइफल शूटर श्रेया का निशानेबाजी में सफर 2015- 2016 में शुरू हो गया था,जब उसे गन फार ग्लोरी शूटिंग अकादमी जबलपुर में टैलेंट सर्च प्रोग्राम के माध्यम से प्रवेश मिला था। निरंतर अभ्यास से उसने अपने आप को तराशा। चार से छह घंटे कोच निशांत नथवानी के मार्गदर्शन में कठोर अभ्यास से उसने काहिरा में पदक विजेता का सफर तय किया है। 2022 के बाद स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के कारण श्रेया राष्ट्रीय स्क्वाड का हिस्सा नहीं बन पाई थीं।हालांकि, इस दौरान उन्होंने निरंतर मेहनत जारी रखी और अपने खेल को बेहतर बनाने के लिए मानसिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर स्वयं पर कार्य किया। उनकी यह दृढ़ता और समर्पण ही वर्ल्ड चैंपियनशिप में सफलता का आधार बना। साल 2018 में मध्य प्रदेश सरकार ने श्रेया को एकलव्य अवार्ड से नवाजा था और साल 2019 में वह देश की नंबर एक राइफल शूटर बन गई। अवगत हो कि 10 वर्षों से श्रेया गन फॉर ग्लोरी शूटिंग अकादमी में सीनियर कोच निशांत नथवानी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही हैं। इस जीत में यह भी बताना जरूरी है कि जब श्रेया विश्व चैंपियनशिप मिस्र में भाग ले रही थी, तब उनकी नानी का निधन जबलपुर में हुआ और चैंपियनशिप के दौरान उनका अंतिम संस्कार हो रहा था। जिसकी जानकारी परिजनों द्वारा चैंपियनशिप के कारण नहीं दी गई थी। श्रेया का बचपन से ही अपने नाना-नानी से बेहद लगाव रहा हैं। श्रेया अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने परिजनों और शुभचिंतकों को मानती हैं।


