मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक सनसनीखेज फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिस व्यवस्था पर भविष्य गढ़ने की जिम्मेदारी है, वहीं कुछ शिक्षकों ने फर्जी डिग्रियों से अपना करियर गढ़ लिया।
राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने अब ऐसे शिक्षकों पर शिकंजा कस दिया है जिन्होंने फर्जी डी.एड. (डिप्लोमा इन एजुकेशन) की अंकसूचियों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की थी।
एसटीएफ ने अब तक 8 शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, जबकि 26 अन्य संदिग्धों की जांच अभी जारी है। शुरुआती जांच में पाया गया कि भोपाल माध्यमिक शिक्षा मंडल से जारी बताई गई कई अंकसूचियां असली में थीं ही नहीं — यानी दस्तावेज पूरी तरह कूटरचित (फर्जी) थे।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क ने भर्ती प्रक्रिया के समय सत्यापन रिपोर्ट तक फर्जी तैयार करवा ली थी। यानी केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि नियुक्ति से लेकर सत्यापन तक हर स्तर पर हेराफेरी की गई थी।
डीजीपी कैलाश मकवाणा ने इस प्रकरण को “शिक्षा व्यवस्था पर हमला” बताते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद एसटीएफ के विशेष महानिदेशक पंकज कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।
जिन शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज हुई है, उनमें शामिल हैं —
गंधर्व सिंह रावत, साहब सिंह कुशवाह, बृजेश रोरिया, महेंद्र सिंह रावत, लोकेन्द्र सिंह, रूबी कुशवाह, रविंद्र सिंह राणा और अर्जुन सिंह चौहान।
ये सभी वर्तमान में मुरैना, शिवपुरी, ग्वालियर और इंदौर समेत कई जिलों के शासकीय स्कूलों में कार्यरत थे।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई साधारण फर्जीवाड़ा नहीं बल्कि संगठित गिरोह का काम है जिसने सरकारी नियुक्तियों में घुसपैठ कर शिक्षा व्यवस्था को भीतर से खोखला किया है।
एसटीएफ अब इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, दलालों और सहयोगियों की पहचान में जुटी है। आने वाले दिनों में और चौंकाने वाले खुलासे संभव हैं।


