कम्युनिटी हॉल बना अस्थाई भंडार गृह, स्थाई स्टोर होने के बावजूद महंगे कंप्यूटर और इलेक्ट्रिकल सामान की सुरक्षा पर सवाल
घटना के समय को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले ही नगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार ने पूर्व भंडार प्रभारी से जुड़े एक मामले में जांच के निर्देश दिए थे। इसके लगभग एक सप्ताह बाद ही निगम के स्टोर में चोरी की घटना सामने आ गई। ऐसे में जांच के निर्देश और चोरी की घटना के बीच के समय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
आशंका जताई जा रही है कि कहीं चोरी की आड़ में पुराने स्टॉक की कमी अथवा पूर्व में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़े तथ्यों पर पर्दा डालने की आशंका तो नहीं की जा रही है? हालांकि, फिलहाल इस आशंका की पुष्टि करने वाले कोई ठोस तथ्य सामने नहीं आए हैं। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
कम्युनिटी हॉल बना अस्थाई भंडार गृह, स्थाई स्टोर होते हुए भी महंगा सामान असुरक्षित क्यों?
चोरी की घटना जिस स्थान पर हुई, उसे लेकर भी नगर निगम की भंडारण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस कम्युनिटी हॉल में सामान रखा गया था, वह नगर निगम का मुख्य भंडार गृह नहीं है। निगम का स्थाई स्टोर मौजूद होने के बावजूद कम्युनिटी हॉल का इस्तेमाल अस्थाई भंडार गृह के रूप में किया जा रहा था।
ऐसे में सवाल उठता है कि कम्युनिटी हॉल को भंडार गृह के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति किस अधिकारी ने दी? महंगे कंप्यूटर और इलेक्ट्रिकल सामान को सुरक्षित एवं स्थाई स्टोर में रखने के बजाय अस्थाई स्थान पर क्यों रखा गया? वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
यदि महंगे सरकारी सामान को अस्थाई स्थान पर रखा गया था, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी और कर्मचारी की थी? इन सवालों का जवाब नगर निगम प्रशासन को देना होगा।
स्टॉक मिलान के बाद सामने आएगी चोरी की वास्तविक तस्वीर
फिलहाल नगर निगम द्वारा स्टोर में उपलब्ध अन्य सामान का मिलान कराया जा रहा है। स्टॉक मिलान पूरा होने के बाद ही चोरी गए सामान की वास्तविक संख्या और कुल कीमत का आधिकारिक खुलासा हो सकेगा।
लेकिन इस मामले में जांच केवल चोरी की एफआईआर दर्ज कराने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पूरे भंडार का भौतिक सत्यापन, पिछले तीन वर्षों की खरीदी और वितरण का रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर तथा कम्युनिटी हॉल को अस्थाई भंडार गृह बनाने की अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच होनी चाहिए।
इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी या कर्मचारी को सौंपी गई थी और सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां हुई।
सबसे बड़ा सवाल: चोरी किसने की, लेकिन लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा?
नगर निगम के पास सामान रखने के लिए स्थाई भंडार गृह मौजूद था, फिर महंगे कंप्यूटर और इलेक्ट्रिकल सामान को अस्थाई कम्युनिटी हॉल में रखने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या इसके लिए कोई लिखित अनुमति ली गई थी? क्या स्टॉक का नियमित सत्यापन होता था?
चोरी किसने की, यह पुलिस जांच का विषय है, लेकिन सरकारी सामान की सुरक्षा और भंडारण व्यवस्था में यदि लापरवाही हुई है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
अब देखना यह है कि नगर निगम प्रशासन इस मामले में केवल चोरी की जांच तक सीमित रहता है या फिर स्टॉक की पुरानी स्थिति से लेकर भंडारण व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तक पूरी जांच कराता है।


