कटनी। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर रविवार, 1 नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थसिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पुष्य नक्षत्र को 27 नक्षत्रों में अत्यंत शुभ माना जाता है। इस बार रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र पड़ने से इसे रवि पुष्य योग कहा जा रहा है। मान्यता है कि इस योग में किए गए शुभ कार्य, खरीदारी और निवेश दीर्घकालिक समृद्धि एवं स्थिरता प्रदान करते हैं।
आचार्य पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी “बुलट महाराज” के अनुसार पुष्य शब्द का अर्थ पोषण करना अथवा पोषण प्रदान करने वाला है। पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा भी कहा जाता है। वैदिक ज्योतिष में गाय के थन को इसका प्रतीक चिह्न माना गया है, जबकि देवगुरु बृहस्पति इसके अधिदेवता हैं। बृहस्पति को देवताओं का गुरु माना जाता है। इसी कारण पुष्य नक्षत्र को शुभता, समृद्धि और उन्नति से जोड़कर देखा जाता है।
*27 घंटे तक रहेगा पुष्य नक्षत्र*
इस बार पुष्य नक्षत्र 1 नवंबर की सुबह लगभग 5:39 बजे प्रारंभ होकर 2 नवंबर की सुबह लगभग 8:40 बजे तक रहेगा। रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र होने से रवि पुष्य योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही सर्वार्थसिद्धि योग और सप्तमी तिथि का संयोग भी इस दिन को विशेष बना रहा है।
*खरीदारी के लिए शुभ माना गया है दिन*
रवि पुष्य योग में सोने-चांदी के सिक्के, आभूषण, बर्तन, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की खरीदारी शुभ मानी जाती है। इसके अलावा नई कार, बाइक, स्कूटर, ट्रैक्टर तथा अन्य वाहनों की बुकिंग या डिलीवरी भी कराई जा सकती है। मकान, प्लॉट, फ्लैट, दुकान, मशीनरी और कारोबार से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी के लिए भी इसे शुभ अवसर माना जाता है।
*पूजा-पाठ और दान का भी विशेष महत्व*
रविवार को सप्तमी तिथि होने के कारण सूर्यदेव की पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्यदेव को अर्घ्य देकर पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इसके साथ ही जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन का दान करना भी पुण्यदायी माना गया है। घर में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं, श्री यंत्र, शिवलिंग, धार्मिक ग्रंथ, दीपक और पूजन सामग्री की खरीदारी भी की जा सकती है।
*दिनभर के शुभ मुहूर्त*
“बुलट महाराज” के अनुसार दिन में चर, लाभ, अमृत और शुभ चौघड़िया के समय खरीदारी एवं शुभ कार्य किए जा सकते हैं। वहीं सुबह और शाम के अमृत चौघड़िया को भी विशेष महत्व दिया गया है।
धार्मिक मान्यता: रवि पुष्य योग को धन, समृद्धि, स्थायित्व और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए विशेष माना जाता है। हालांकि शुभ मुहूर्त की सटीक गणना स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना उचित रहेगा।


