रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। जिले की इटारसी नगर तहसील के अंतर्गत सुधार न्यास कॉलोनी क्षेत्र में रसूखदार भाजपा नेता द्वारा संचालित मुस्कान बालिका गृह से 3 साल में पांच नाबालिग बच्चियों के लापता होने के मामले में जहां आरटीआई से मामले में नया खुलासा हुआ है तो वहीं पुलिस अधीक्षक द्वारा गठित एसआईटी के लिए नाबालिग बच्चियों को खोजकर लाना चुनौती बना हुआ है। पिछले दिनों प्रभारी मंत्री राकेश सिंह के नर्मदापुरम आगमन पर मीडिया द्वारा मुस्कान बालिका गृह से नाबालिग बालिकाओं के गायब होने के विषय में सवाल किया था,जिस पर उन्होंने संज्ञान भी लेने की बात कहीं थी। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक साई कृष्णा एस थोटा के निर्देश पर इटारसी पुलिस द्वारा 17 जुलाई 2026 को 5 नाबालिग बालिकाओं के लापता होने के मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। उसके साथ ही एसपी द्वारा मामले में जांच हेतु SIT का गठन कर बालिकाओं को दस्तयाब के निर्देश भी दिए गए थे। जिसके बाद से मामले को लेकर खासा हड़कंप मचा हुआ है। वहीं उक्त घटना से संस्था की कार्य प्रणाली और सुरक्षा प्रबंधन पर भी बड़े सवाल खड़े होते हैं कि 24 घंटे के अंदर पुलिस को सूचना देकर गुमशुदगी की एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई गई? जबकि संस्था संचालक मनीष ठाकुर महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से पॉस्को मामलों में सपोर्ट पर्सन के रूप में नियुक्त भी हैं। वह भाजपा के रसूखदार नेता होने के साथ ही उनकी पत्नी नगर पालिका में सभापति भी है, जिसके कारण मामला राजनीतिक चर्चा में भी है। दूसरी तरफ पुलिस टीम के अथक प्रयासों से जहां करीब डेढ़ माह बाद एक बालिका को उज्जैन से दस्तयाब कर लिया गया,परंतु बालिका की सुरक्षित बरामदगी की जानकारी प्रेस नोट से नहीं दी गई। वहीं उक्त मामले में एक गंभीर विषय यह भी सामने आया है कि महिला एवं बाल विकास विभाग नर्मदापुरम द्वारा सूचना के अधिकार के तहत इटारसी मुस्कान बालिका गृह से पांच नाबालिग बच्चियों के गायब होने के मामले में संस्था संचालक द्वारा बाल कल्याण समिति को नाबालिग बालिकाओं के संस्था से गायब होने से संबंधित कोई जानकारी नहीं दी गई थी। सवाल यह भी खड़ा होता है कि जहां से बार-बार नाबालिग बच्चिया गायब होती रही और मुस्कान बालिका गृह के संचालक मनीष ठाकुर द्वारा क्यों सूचना नहीं दी गई? वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग सहित बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों द्वारा काम बालिका गृह की उक्त गंभीर खामी को निरीक्षण के दौरान क्यों नहीं पकड़ पाए जिस पर भी बड़े सवाल हैं? मामले को लेकर एडिशनल एसपी अभिषेक राजन ने बताया कि एसआईटी द्वारा गंभीरता से जांच की जा रही है और पुलिस टीम लगातार गुमशुदा बच्चियों की तलाश कर रही है। एक बालिका को उज्जैन से दस्तयाब किया गया है क्योंकि वह 18 वर्ष पूर्ण कर चुकी है तो उसे उसकी इच्छानुसार भेज दिया गया। संस्था संचालक द्वारा नाबालिग लापता बच्चियों के संबंध में सूचना नहीं देना गंभीर विषय है। पूरे मामले की जांच चल रही है। जल्द ही हम अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।


