स्वास्थ्य विभाग में जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला कटनी जिले की रीठी स्वास्थ्य केंद्र का है, जहां एक संविदा डॉक्टर को ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) का प्रभार सौंपने के साथ बिलहरी और घुघरा की जिम्मेदारी भी दी गई है । इतना ही नहीं, विभाग में अन्य संविदा कर्मचारियों को भी अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की जानकारी सामने आई है l वही संबंधित मुख्यालयों में नियमित कर्मचारियों की मौजूदगी के बावजूद भी संविदा कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपे जाने की व्यवस्था को लेकर लोगो मैं चर्चा का विषय बना हुआ है l
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग में प्रभार आवंटन का आधार क्या है,,? जब मुख्यालय में नियमित कर्मचारी मौजूद हैं, तो अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपने के लिए संविदा कर्मचारियों को ही प्राथमिकता क्यों दी जा रही है,,? क्या इस कार्य विभाजन के पीछे कोई स्पष्ट प्रशासनिक आधार है, या फिर विभागीय स्तर पर इसकी समीक्षा की आवश्यकता है,,?
*एक संविदा डॉक्टर, तीन जगहों की जिम्मेदारी!*
रीठी में एक संविदा डॉक्टर को बीएमओ का प्रभार सौंपा तो गया है। इसके साथ ही बिलहरी और घुघरा का भी अतिरिक्त प्रभार भी उन्हीं के पास है। एक ही अधिकारी पर कई स्थानों की जिम्मेदारी होने से प्रशासनिक निगरानी, कर्मचारियों के कामकाज की समीक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बीएमओ का पद स्वास्थ्य व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि एक साथ कई स्थानों का प्रभार संभालने की स्थिति में संबंधित अधिकारी तीनों क्षेत्रों की व्यवस्थाओं की निगरानी किस प्रकार करते हैं। क्या सभी केंद्रों पर नियमित निरीक्षण, प्रशासनिक नियंत्रण और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो पा रही है या नही,,? इन सवालों पर विभागीय अधिकारियों का स्पष्टीकरण आवश्यक है।
*नियमित कर्मचारी मौजूद, फिर भी संविदा कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रभार क्यों,,?*
मामला केवल संविदा डॉक्टर तक सीमित नहीं है। प्राप्त जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग में अन्य संविदा कर्मचारियों को भी अतिरिक्त प्रभार सौंपे गए हैं, जबकि मुख्यालय में नियमित कर्मचारी भी मौजूद हैं। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों के वितरण को लेकर सवाल उठना लाजमी है। यदि नियमित कर्मचारी उपलब्ध हैं, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अतिरिक्त प्रभार सौंपने के लिए किन मानकों को आधार बनाया गया । क्या नियमित कर्मचारियों की पात्रता, कार्यभार और उपलब्धता का आकलन किया गया,,? क्या प्रभार आवंटन से पहले सभी संबंधित कर्मचारियों के विकल्पों पर विचार किया गया,,? या फिर विभाग में जिम्मेदारियों के वितरण की कोई अलग व्यवस्था लागू है,?
यह मामला किसी कर्मचारी के संविदा या नियमित होने से अधिक, प्रभार आवंटन में पारदर्शिता, समान अवसर और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा है। विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपने के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई और उसके पीछे क्या प्रशासनिक आवश्यकता थी।
*मुख्यालय में निवास नहीं करते प्रभारी बीएमओ!*
इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने निकलकर आया है। जानकारी के अनुसार, रीठी के प्रभारी बीएमओ मुख्यालय में निवास नहीं करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि मुख्यालय में निवास संबंधी लागू निर्देशों का पालन किया जा रहा है l स्वास्थ्य सेवाओं में आपातकालीन परिस्थितियों और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए संबंधित अधिकारियों की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। यदि प्रभारी अधिकारी मुख्यालय में निवास नहीं करते, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि आवश्यकता पड़ने पर उनकी उपलब्धता और स्वास्थ्य केंद्रों की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था है ।और कोन जिम्मेदार है l
*नियमों के अनुरूप हो जिम्मेदारियों का बंटवारा*
स्वास्थ्य विभाग का दायित्व आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए जरूरी है कि प्रशासनिक पदों और अतिरिक्त प्रभारों का वितरण स्पष्ट नियमों, निर्धारित पात्रता और वास्तविक विभागीय आवश्यकता के आधार पर किया जाए।
रीठी में संविदा डॉक्टर को बीएमओ के साथ बिलहरी और घुघरा की जिम्मेदारी सौंपने तथा अन्य संविदा कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रभार देने के मामले में विभागीय स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है। विशेषकर तब, जब संबंधित मुख्यालयों में नियमित कर्मचारी भी मौजूद हैं।
अब सवाल यह उठता है कि प्रभार आवंटन की इस व्यवस्था का आधार क्या है,? क्या यह निर्णय निर्धारित नियमों और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप लिया गया है,,? क्या नियमित कर्मचारियों की उपलब्धता के बावजूद संविदा कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपने के पर्याप्त कारण हैं,?
अब देखना होगा कि इस मामले मैं संबंधित उच्च अधिकारी क्या ठोस कदम उठाते हैं l
हरिशंकर बेन


