MP NEWS CAST मनीष गौतम 8989858230
आज की देवी मां स्कंदमाता हैं। शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन गुरुवार, 15 अक्टूबर को मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां स्कंदमाता की आराधना करने से भक्तों को सुख, शांति, समृद्धि और संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं। उनकी गोद में भगवान स्कंद अर्थात कार्तिकेय विराजमान रहते हैं। माता का वाहन सिंह है और उनके स्वरूप में मातृत्व, करुणा, शक्ति तथा ममता का संदेश मिलता है।
मां स्कंदमाता की पूजा विधि
नवरात्रि के पांचवें दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
मां के सामने घी का दीपक जलाएं।
माता को लाल या पीले फूल, अक्षत, कुमकुम और धूप अर्पित करें।
केले और अन्य फल या अपनी श्रद्धा के अनुसार सात्विक भोग लगाएं।
मां स्कंदमाता के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
अंत में मां की आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करें।
मां स्कंदमाता का शक्तिशाली मंत्र
मां की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप कर सकते हैं:
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥
इस मंत्र का 108 बार जाप करना श्रद्धालुओं के लिए एक प्रचलित धार्मिक साधना है।
मां स्कंदमाता को क्या भोग लगाएं?
धार्मिक परंपराओं में मां स्कंदमाता को केला और अन्य ताजे फल अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार सात्विक प्रसाद चढ़ा सकते हैं।
मां स्कंदमाता की पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां स्कंदमाता की आराधना से परिवार में सुख-शांति, सकारात्मकता और समृद्धि की कामना की जाती है। माता का स्वरूप भक्तों को ममता, करुणा और अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।
जय माता दी!
डिस्क्लेमर: पूजा विधि और धार्मिक मान्यताएं परंपराओं पर आधारित हैं। पूजा के शुभ मुहूर्त के लिए अपने स्थानीय पंचांग का संदर्भ लें।
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