छिंदवाड़ा। धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस के पावन अवसर पर आज स्थानीय समता बुद्ध विहार, अंबेडकर नगर, छिंदवाड़ा में डॉ. आंबेडकर समता विकास समिति के तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पूज्य भंते डॉ. शुभमचित्त जी ने धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस के ऐतिहासिक, सामाजिक एवं वैचारिक महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित उपासक-उपासिकाओं को संबोधित किया।
भंते डॉ. शुभमचित्त जी ने बताया कि 14 अक्टूबर 1956 को भारत रत्न बोधिसत्व डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने नागपुर की पावन दीक्षाभूमि पर बौद्ध धम्म की दीक्षा ग्रहण कर एक ऐतिहासिक सामाजिक एवं धार्मिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया। यह दिन समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व, करुणा और प्रज्ञा पर आधारित समाज निर्माण की प्रेरणा देता है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से भगवान बुद्ध के धम्म को अपने जीवन में आत्मसात करने तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नैतिकता और मानवतावादी मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में डॉ. सुरेश अहिरवार एवं ओमकार चौहान सहित अन्य वक्ताओं ने भी धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस के महत्त्व पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के सामाजिक परिवर्तन, शिक्षा, समानता और मानवाधिकारों के लिए किए गए ऐतिहासिक योगदान को स्मरण करते हुए उनके विचारों को जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में डॉ. आंबेडकर समता विकास समिति के अध्यक्ष इंजीनियर संदीप बोरकर, उपाध्यक्ष मीना ठवरे, महासचिव कमलेश कुमार चौरासे एवं कोषाध्यक्ष डॉ. प्रमोद वासनिक सहित समिति के पदाधिकारी, संरक्षक, कार्यकारिणी सदस्य तथा बड़ी संख्या में उपासक-उपासिकाएँ उपस्थित रहे।
समिति के संरक्षक एवं कार्यकारिणी सदस्य:
शिवनाथ नारनवरे, भीमराव सोमकुंवर, ओमकार चौहान, आनंद राव गजभिए, देवेंद्र खांडेकर, सूर्यकांता गजभिए, वंदना सहारे, तोड़े आई, छवि खांडेकर, सी डी चौरे,डॉ. सुरेश अहिरवार, वीरेंद्र सोमकुंवर, संदीप गायकवाड़, शीलवंत बंसोड, शिरीष, प्रशांत गजभिए, दीपकराज बागड़े एवं सुभाष गजभिए सहित मीडिया प्रभारी शुभम सहारे अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संदेश था कि धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस केवल ऐतिहासिक स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और मानवीय गरिमा पर आधारित समाज के निर्माण के संकल्प को दोहराने का दिन है।


