उमरियापान। धार्मिक आस्था, उत्साह और भक्ति के वातावरण में कटरा बाजार उमरियापान में आयोजित भव्य रामलीला के दौरान प्रभु श्रीरामचंद्र जी की बारात धूमधाम से निकाली गई। नगर भ्रमण पर निकली भगवान श्रीराम की
बारात का जगह-जगह श्रद्धालुओं एवं दुर्गा उत्सव समितियों ने भव्य स्वागत किया। जय श्रीराम के जयकारों से नगर का वातावरण भक्तिमय हो उठा। बारात के स्वागत से लेकर माता सीता और प्रभु श्रीराम के वरमाला प्रसंग तथा लक्ष्मण-परशुराम संवाद तक रामलीला के विभिन्न दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
न्यू बस स्टैंड दुर्गा उत्सव समिति ने किया भव्य स्वागत
प्रभु श्रीरामचंद्र जी की बारात जब न्यू बस स्टैंड पहुंची, तब न्यू बस स्टैंड दुर्गा उत्सव समिति द्वारा बारात का भव्य स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वागत के दौरान उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। इसके बाद बारात नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए झंडा चौक की ओर रवाना हुई। बारात के नगर भ्रमण के दौरान श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ प्रभु श्रीराम का स्वागत किया।
झंडा चौक सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति ने कराया जलपान और स्वल्पाहार
बारात के झंडा चौक पहुंचने पर झंडा चौक सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति द्वारा भगवान श्रीराम की बारात का भव्य एवं पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। समिति के सदस्यों ने बारातियों का आत्मीय अभिनंदन करते हुए जलपान एवं स्वल्पाहार की व्यवस्था की। धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। भगवान श्रीराम के जयकारों के बीच बारात का स्वागत किया गया और रामलीला के आयोजन को लेकर लोगों में विशेष उत्साह नजर आया।
माता सीता ने प्रभु श्रीराम को पहनाई वरमाला
रामलीला में विवाह प्रसंग का मंचन आकर्षण का केंद्र रहा। रामायण के प्रसंग के अनुसार राजा जनक द्वारा आयोजित सीता स्वयंवर में अनेक राजा-महाराजा भगवान शिव के धनुष को उठाने और उसकी प्रत्यंचा चढ़ाने में असफल रहे। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा से प्रभु श्रीराम ने धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, जिससे शिवधनुष टूट गया। धनुष भंग होते ही पूरा स्वयंवर स्थल जयकारों से गूंज उठा।
इसके पश्चात माता सीता ने प्रभु श्रीराम के गले में वरमाला पहनाई। यह दृश्य देखकर उपस्थित दर्शक भावविभोर हो उठे। राजा जनक ने प्रसन्नतापूर्वक बारातियों का स्वागत किया। विवाह प्रसंग के मंचन ने रामलीला में चार चांद लगा दिए और श्रद्धालुओं को त्रेतायुग की पावन कथा की अनुभूति कराई।
धनुष भंग के बाद हुआ लक्ष्मण-परशुराम संवाद
शिवधनुष टूटने का समाचार मिलने पर भगवान परशुराम क्रोधित होकर स्वयंवर स्थल पर पहुंचे। इसके बाद रामलीला में लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखे संवाद का सजीव मंचन किया गया। लक्ष्मण जी के निर्भीक उत्तर और परशुराम जी के क्रोधपूर्ण संवादों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। दोनों पात्रों के बीच हुए संवाद के दौरान दर्शक मंत्रमुग्ध होकर रामलीला का आनंद लेते रहे।
प्रसंग के दौरान प्रभु श्रीराम ने विनम्रता, धैर्य और मर्यादा का परिचय देते हुए परशुराम जी के प्रति आदरभाव प्रकट किया। भगवान श्रीराम के शांत एवं मर्यादित व्यवहार से प्रसंग को आगे बढ़ाया गया। रामायण के इस महत्वपूर्ण प्रसंग ने दर्शकों को मर्यादा, विनम्रता और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
धार्मिक आयोजनों से नगर में बना भक्तिमय वातावरण
उमरियापान के कटरा बाजार में आयोजित रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया जा रहा है। प्रभु श्रीराम की बारात का नगर भ्रमण, दुर्गा उत्सव समितियों द्वारा स्वागत, माता सीता-श्रीराम का वरमाला प्रसंग तथा लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने आयोजन को विशेष बना दिया।
रामलीला के माध्यम से श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। नगर में धार्मिक उत्साह और भक्ति का वातावरण बना हुआ है।
रिपोर्टर राजेंद्र कुमार चौरसिया धीमरखेडा कटनी


