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कलेक्टर तिवारी ने ग्राम पंचायत घुघरा में आयोजित जनसंवाद शिविर में सुनीं 95 ग्रामीणों की समस्याएं, अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण के दिए निर्देश

by Manish Gautam Chiefeditor
October 9, 2026
in कटनी
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कलेक्टर तिवारी ने ग्राम पंचायत घुघरा में आयोजित जनसंवाद शिविर में सुनीं 95 ग्रामीणों की समस्याएं, अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण के दिए निर्देश
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कटनी – मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान-2026 के अंतर्गत शुक्रवार को ग्राम पंचायत घुघरा में आयोजित जनसंवाद शिविर कार्यक्र में कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को प्रकरणों का नियमानुसार परीक्षण कर समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शिविर में कुल 95 आवेदन प्राप्‍त हुये।

इस दौरान पुलिस अधीक्षक श्री अभिनय विश्वकर्मा, जिला पंचायत सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर, वनमण्डलाधिकारी श्री गर्वित गंगवार, एसडीएम कटनी श्री जितेन्द्र पटेल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

शिविर में ग्रामीण विभिन्न विभागों से संबंधित समस्याएं और मांगों के आवेदन लेकर पहुंचे। किसी ने राजस्व विभाग से संबंधित शिकायत की, तो किसी ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास, खाद्य, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास विभाग से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। कलेक्टर श्री तिवारी ने प्रत्येक आवेदक की बात गंभीरता और धैर्यपूर्वक सुनी तथा संबंधित अधिकारियों से प्रकरण की स्थिति की जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

कलेक्टर श्री तिवारी ने कहा कि जनसमस्याओं के निराकरण में समय-सीमा और गुणवत्ता दोनों का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि ग्रामीणों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

शिविर समाप्ति के बाद भी ग्रामीणों से किया संवाद

कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने शिविर समाप्त होने के बाद भी ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने ग्रामीणों से पूछा कि उनकी कोई अन्य समस्या तो नहीं है। इससे ग्रामीणों में अपनी समस्याओं के समाधान को लेकर भरोसा और विश्वास का भाव नजर आया।
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Manish Gautam Chiefeditor

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ओबीसी आरक्षण एक बेहद संवेदनशील विषय है। आज जबलपुर हाईकोर्ट का जो फैसला आया है, उसमें कमलनाथ सरकार के आरक्षण संबंधी अध्यादेश को निरस्त किया गया है। भारतीय जनता पार्टी सदैव पिछड़ा वर्ग के हितों की समर्थक रही है। चाहे ओबीसी आरक्षण का विषय हो या ओबीसी आयोग को संवैधानिक मान्यता दिलाने की बात, भाजपा ने हमेशा जिम्मेदारी के साथ काम किया है। माननीय मुख्यमंत्री जी ने इस विषय पर सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी। सभी दलों की सहमति से हम न्यायालय गए और इस मामले में अपना पक्ष रखा।  कांग्रेस को किसी वर्ग के हितों से नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक स्वार्थों से प्रेम है। न्यायालय की टिप्पणियों से यह स्पष्ट हुआ है कि तत्कालीन कमलनाथ सरकार राजनीतिक लाभ के लिए अध्यादेश लेकर आई थी। न्यायालय ने यह भी कहा कि अध्यादेश जल्दबाजी में लाया गया और उसमें ऐसी संवैधानिक त्रुटियां थीं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायालय की एक महत्वपूर्ण टिप्पणी यह भी है कि 50% आरक्षण की सीमा पार करने के लिए आवश्यक संवैधानिक आधार प्रस्तुत नहीं किए गए। प्रदेश के लोगों, विशेषकर युवाओं को इस पूरे मामले को समझना चाहिए।  मेरा कांग्रेस से सवाल है कि जब हम सब मिलकर पिछड़ा वर्ग के हितों की लड़ाई लड़ सकते थे, तब तत्कालीन सरकार ने संवैधानिक मर्यादाओं का पालन क्यों नहीं किया? उस समय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा मिल चुका था, इसके बावजूद तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने आयोग से सहमति लेना उचित नहीं समझा। आज की स्थिति के लिए यही एक प्रमुख कारण है।  इस फैसले में वर्ष 2019 से 2022 के बीच नियुक्त हुए अभ्यर्थियों को नौकरी से नहीं हटाने का निर्णय भी महत्वपूर्ण है। यह राहत देने वाला पहलू है। हालांकि, आगे उनके समायोजन को लेकर चुनौतियां सामने आ सकती हैं। मध्यप्रदेश सरकार इस विषय पर सर्वोच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखेगी। पहले भी सरकार ने इस मामले में पूरी जवाबदेही के साथ अपनी बात रखी है और आगे भी रखेगी। कांग्रेस ने 50% आरक्षण की सीमा से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी की और राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में अध्यादेश लाया। आज न्यायालय ने उस अध्यादेश को निरस्त कर दिया है। हालांकि, यह हमारे लिए अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए प्रदेश सरकार पिछड़ा वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए सर्वोच्च न्यायालय में भी अपना पक्ष रखेगी।  इस पूरे मामले में सरकार लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रही थी, लेकिन कांग्रेस जबरन इसका श्रेय लेने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस को इन सवालों का जवाब देना होगा कि संवैधानिक प्रावधानों और मर्यादाओं का पालन क्यों नहीं किया गया। मेरा आरोप है कि कांग्रेस किसी वर्ग की हितैषी नहीं है, बल्कि अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए काम करती है।  – *श्री प्रह्लाद सिंह पटेल, कैबिनेट मंत्री*

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