रिपोर्टर सत्येंद्र बर्मन
निर्माणाधीन भवन में मानकों की अनदेखी का आरोप, ग्रामीणों ने सामग्री के नमूने लेकर जांच कराने की मांग की
ढीमरखेड़ा। ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत बरहटा में करीब 11 लाख रुपए की लागत से बन रहे आंगनवाड़ी भवन का निर्माण शुरू होते ही सवालों के घेरे में आ गया है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में गुणवत्ता और तकनीकी मापदंडों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए जनपद और जिला स्तर के अधिकारियों से तत्काल जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि भवन की नींव और प्लिंथ से लेकर निर्माण सामग्री के उपयोग तक कई ऐसे बिंदु हैं, जिनकी तकनीकी जांच जरूरी है।
पंचायत की बाउंड्री तोड़कर बना रहे गेट, अनुमति पर सवाल
ग्रामीणों के अनुसार आंगनवाड़ी भवन पंचायत भवन परिसर से लगे स्थान पर बनाया जा रहा है। निर्माण के दौरान पंचायत भवन की पुरानी बाउंड्री वॉल का हिस्सा तोड़कर उसी ओर से आंगनवाड़ी भवन का मुख्य प्रवेश द्वार बनाया जा रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि बाउंड्री तोड़ने की अनुमति किस अधिकारी या स्तर से मिली और टूटे हिस्से का पुनर्निर्माण किस मद से कराया जाएगा। इसकी भी जांच की मांग की गई है।
बीम-प्लिंथ की पुराई में मिट्टी इस्तेमाल करने का आरोप
निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों की सबसे बड़ी आपत्ति बीम और प्लिंथ की पुराई को लेकर है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुराई में निर्धारित सामग्री के बजाय मिट्टी का इस्तेमाल किया गया है। उनका कहना है कि यदि तकनीकी मापदंडों के विपरीत पुराई की गई है तो भविष्य में भवन की मजबूती पर असर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने निर्माणाधीन हिस्से की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
भसुआ रेत के इस्तेमाल का भी आरोप
ग्रामीणों ने भवन निर्माण में उपयोग हो रही रेत की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि निर्माण में भसुआ रेत का इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 11 लाख रुपए की लागत वाले सरकारी भवन में उपयोग होने वाली सामग्री की गुणवत्ता की जांच होना जरूरी है। उन्होंने रेत, गिट्टी, सीमेंट और सरिया के नमूने लेकर प्रयोगशाला अथवा तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
सप्ताह में एक बार सचिव के आने का आरोप
पंचायत के कामकाज को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव सैयद भाईजान पंचायत में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते और सप्ताह में करीब एक बार ही पंचायत में आने की बात कही जा रही है। इसके चलते ग्रामीणों को पंचायत संबंधी कार्यों के लिए परेशान होना पड़ता है। ग्रामीणों ने सचिव की उपस्थिति और पंचायत संचालन के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
अन्य पंचायतों में कार्यकाल को लेकर भी उठाए सवाल
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत सचिव सैयद भाईजान जहां-जहां पदस्थ रहे हैं, वहां उनके कार्यकाल को लेकर भी विवाद और शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित सचिव के पूर्व कार्यकाल और वर्तमान पंचायत में उनकी कार्यप्रणाली की भी जांच की जाए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
शनिवार को पंचायत भवन में मिला ताला
ग्रामीणों के मुताबिक शनिवार को पंचायत भवन में ताला लगा मिला। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब पंचायत से जुड़े कार्य लगातार चलते रहते हैं तो पंचायत भवन में नियमित रूप से जिम्मेदारों की मौजूदगी क्यों नहीं रहती। उन्होंने पंचायत भवन के संचालन, कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्यालयीन रिकॉर्ड की भी जांच की मांग की है।
सरपंच पति के हस्तक्षेप का भी आरोप
ग्रामीणों ने पंचायत के कामकाज में सरपंच पति के कथित हस्तक्षेप का भी आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के कई कामों में सरपंच पति की भूमिका रहती है और वही पंचायत के कामकाज को देखते हैं। हालांकि इस आरोप की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने पंचायत के कार्यों और निर्णय प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
काम पूरा होने से पहले जांच जरूरी
ग्रामीणों का कहना है कि आंगनवाड़ी भवन अभी निर्माणाधीन है। ऐसे में यदि निर्माण में किसी स्तर पर गड़बड़ी या तकनीकी कमी है तो अभी जांच कर उसे सुधारा जा सकता है। निर्माण पूरा होने के बाद जांच होने पर सुधार और कार्रवाई दोनों मुश्किल हो सकते हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर और जनपद पंचायत के अधिकारियों से मौके का निरीक्षण कराने, स्वीकृत नक्शे एवं तकनीकी प्राक्कलन के अनुसार निर्माण की जांच करने तथा निर्माण सामग्री के नमूने लेकर परीक्षण कराने की मांग की है। अब सवाल यह है कि 11 लाख रुपए की लागत से बन रहे इस सरकारी भवन के निर्माण पर उठ रहे सवालों को जिम्मेदार अधिकारी गंभीरता से लेते हैं या निर्माण पूरा होने के बाद ही गुणवत्ता की जांच की जाएगी।


