कटनी जिले के रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का एक कारनामा सामने आया है। जहा प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी द्वारा दिनांक 19 सितंबर को जारी पत्र क्र. BMO/2026/685 में चिकित्सा अधिकारियों का साप्ताहिक ड्यूटी रोस्टर जारी किया गया है l पर रोस्टर जारी करने वाले संविदा कर्मचारी प्रभारी बीएमओ और एमओ का ही, नाम गायब है।

जारी रोस्टर के अनुसार डॉ. सुजस मोदी, डॉ. योगेश सिंह, डॉ. आदर्श पाठक, डॉ. अभिराज पटेल, डॉ. शिवम लोधी और डॉ. अजय प्रताप सिंह की सोमवार से रविवार तक ड्यूटी लगाई गई है। जिसमे सुबह 9 से शाम 6 बजे तक (9 घंटा) और शाम 6 से सुबह 9 बजे तक (15घंटा ) यानेकि 15 घंटे की नाइट शिफ्ट लगाकर जूनियर डॉक्टरों का शोषण l 15 घंटे की नाइट ड्यूटी कोई नियम नहीं, बल्कि मानवाधिकार उल्लंघन है। जबकि एनएचएम गाइडलाइन में 8-8 घंटे की 3 शिफ्ट होती है। मतलब – जूनियर डॉक्टरों पर पूरा भार, और सीनियर अफसर की मौज ।
जिसको लेकर स्वस्थ्य कर्मी भारी अक्रोश व्याप्त कर सवाल खड़े कर दिए हैं l कि जब प्रभारी बीएमओ, खुद अस्पताल के प्रभारी हैं तो उनकी OPD और इमरजेंसी ड्यूटी क्यों नहीं,,,,,?
15 घंटे की लगातार रात्रि ड्यूटी, कौन से नियम में है,,,? डॉक्टर कोई मशीन नही,, वह भी इंसान है,,.?
जबकि मध्यप्रदेश शासन स्वास्थ्य संचालन नियमानुसार बीएमओ खुद ड्यूटी से बाहर नहीं है l बीएमओ प्रभारी है तो उसकी जिम्मेदारी है ,कि वह 24 घंटे, ऑन-कॉल रहेगा और उसका नाम रोस्टर में सबसे ऊपर,,, प्रभारी – आकस्मिक निरीक्षण /ऑन कॉल के रूप में दर्ज होना अनिवार्य है। साथ ही मेडिकल ऑफिसर की OPD + इमरजेंसी + नाइट ड्यूटी रोस्टर में लिखना अनिवार्य होता है। NHM गाइडलाइन कहती है – BMO और MO को मिलाकर रोस्टर बनाते है l परंतु खुद को बाहर रखना मतलब – हम अफसर हैं, ड्यूटी नहीं करेंगे l सिर्फ भ्रष्टाचार और छोटे कर्मचारियों का शोषण करेंगे l
वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के अनुसार, शासन की गाइडलाइन में स्पष्ट है ,ड्यूटी रोस्टर में प्रभारी सहित सभी चिकित्सकों का नाम, समय और मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से अस्पताल परिसर मैं चस्पा होना चाहिए। लेकिन यहां सब उल्टा है, खुद को बाहर रखना अनुशासनहीनता और सीधा सीधा पद के दुरुपयोग किया जा रहा है l
ग्रामीणों ने CMHO कटनी और कलेक्टर से मांग की है कि इस पक्षपाती रोस्टर को निरस्त कर नया रोस्टर बनाया जाए जिसमें BMO से लेकर स्वीपर तक सबकी ड्यूटी और उपस्थिति पारदर्शी हो। जिससे मरीजों और उनके परिजनों को इलाज मिलने मैं किसी भी प्रकार की असुविधा न हो l
हरिशंकर बेन

