रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। धार्मिक नगरी कहीं जाती नर्मदापुरम का नाम अब साइबर फ्रॉड के मामले में प्रदेश स्तर से लेकर अंतरराज्यीय स्तर तक भी सुर्खियों में आ गया है। जब कुछ माह पूर्व उज्जैन में चार जगह पर क्यूआर कोड से सोना खरीदकर साइबर ठगी को अंजाम दिया गया, तो उक्त घटना को अंजाम देने वाले चेहरे नर्मदापुरम से जुड़े हुए मिले। वहीं पिछले दिनों एक साइबर फ्रॉड के मास्टरमाइंड की करतूतों का खुलासा देहात थाना के अंतर्गत उस वक्त हुआ जब देहात थाना प्रभारी उषा मरावी के पास शिकायत लेकर पहुंची पीड़िता युवती ने बताया कि उसके बॉयफ्रेंड ने उसके साथ झांसा देकर बलात्कार किया और अब शादी करने से इनकार कर दिया। इसी दौरान युवती ने यह भी बताया कि आरोपी युवक साइबर फ्रॉड का मास्टरमाइंड है। थाना प्रभारी ने तत्काल घटना की गंभीरता को समझते हुए पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा एस थोटा सहित एसडीओपी जितेन्द्र कुमार पाठक को पूरी घटना से अवगत कराया। साथ ही साइबर फ्रॉड की घटना को सर्विलांस पर भी डाला गया और जांच की जिम्मेवारी उप निरीक्षक सुखनंदन नर्रे को सौंपी गई। थाना प्रभारी उषा मरावी ने बताया कि जुलाई माह में कॉलेज पढ़ने वाली युवती ने थाने में पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई कि ग्राम रायपुर निवासी युवक हर्षित गौर (24)ने शादी का
झांसा देकर उसके साथ बलात्कार किया है। युवती ने यह भी खुलासा किया कि आरोपी युवक हर्षित गौर ने उसके खाते में पश्चिम बंगाल से डेढ़ लाख रूपयों का ट्रांजैक्शन किया है जो की फ्रॉड का पैसा है। वहीं जांच अधिकारी सुखनंदन नर्रे ने आरोपी युवक को 12 अगस्त को गिरफ्तार कर जेल भेजा। इस दौरान पुलिस सर्विलेंस से पहुंची सूचना के आधार पर साइबर फ्रॉड के मामलों को लेकर पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र के नागपुर, जबलपुर के गोरखपुर थाना, सिटी कोतवाली पुलिस ने भी संपर्क किया। वर्तमान में आरोपी हर्षित गौर सहित उसकी गर्लफ्रेंड को पश्चिम बंगाल पुलिस प्रोटेक्शन वारंट पर लेकर गई है। पुलिस सूत्रों की माने तो हर्षित गौर साइबर फ्रॉड का मास्टरमाइंड है, जो कि 5 – 10 हजार का लालच देकर म्यूल एकाउंट खुलवाकर साइबर फ्रॉड को अंजाम देता है। आरोपी युवकों से आधार कार्ड , फोटो लेकर प्राइवेट बैंकों में खाता खुलवाकर मोबाइल नंबर स्वयं का रखता है और एटीएम, पासबुक खुद रख लेता है। जिसके नाम पर खाता होता है उसका मोबाइल नंबर खाते में नहीं होने से खाते में ट्रांजैक्शन की जानकारी उसे नहीं होती है और जब साइबर फ्रॉड का पैसा इन खातों में ट्रांजैक्शन होता है तो खातेदार स्वयं पुलिस का आरोपी बन जाता है। पुलिस जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि हर्षित के कई बैंकों में खाते हैं, जिसमें कई सिम का उपयोग हुआ है। फिलहाल अलग – अलग जगह की पुलिस द्वारा साइबर फ्रॉड को लेकर जानकारी ली जा रही है। पश्चिम बंगाल के रांगाधार थाना में 6,83,000 रुपये का फ्रॉड हुआ है। इसी प्रकार नागपुर के थाना मोहदा (ग्रामीण) में 5 लाख का फ्रॉड हुआ है। इसी प्रकार जबलपुर के गोरखपुर थाने अंतर्गत साइबर फ्रॉड के मामले में करीब 7 से 8 आरोपी हैं, जिसमें आरोपी का बड़ा भाई अंकित भी शामिल है। पुलिस सूत्रों की माने तो साइबर फ्रॉड के और भी मामले सामने आ सकते हैं और आरोपियों की संख्या भी बढ़ सकती है। फिलहाल पूरा मामला जांच में है।


