रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। जिला मुख्यालय सहित आसपास के
क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कालोनियों का निर्माण हो रहा है। नर्मदापुरम धार्मिक नगरी सहित प्राकृतिक वातावरण से भरपूर मां नर्मदा का किनारा होने से राजधानी सहित आसपास के जिलों से लोगों का आकर्षण का भी केंद्र है। जोकि अपना शेष जीवन धार्मिक नगरी में गुजारना चाहते हैं, ऐसे में नर्मदापुरम में प्रॉपर्टी की कीमत राजधानी से अधिक बताई जाती हैं। यही कारण है कि यहां पर वैध कालोनियों के साथ ही अवैध कॉलोनी का भी निर्माण हो रहा है। जहां पर एक छोटे से प्लॉट की कीमत लाखों में जा रही है। वहीं नर्मदापुरम नगर एवं आसपास के क्षेत्र में निर्माणाधीन कॉलोनियों में मकान निर्माण के लिए खनिज संपदा रेत सहित मकान निर्माण के लिए बेसमेंट में बोल्डर, मिट्टी इत्यादि फीलिंग की बड़ी डिमांड होती हैं। इन निर्माण कार्यों में तवा और नर्मदा की रेत की बड़ी डिमांड रहती है। बारिश के मौसम में निर्माण कार्यों की गति बढ़ जाती है। बारिश के मौसम में जहां इन दिनों एनजीटी की रोक के चलते तवा एवं नर्मदा नदी में रेत उत्खनन पर पूर्णत प्रतिबंध लगा हुआ है। ऐसे में इन नदियों से अवैध रूप से ट्रैक्टर ट्रालियों के माध्यम से रेत की चोरी कर अवैध उत्खनन परिवहन बड़े पैमाने पर हो रहा है। जिससे शासन को लाखों की राजस्व हानि भी उठानी पड़ती है। इस वक्त एक ट्रॉली रेत की कीमत 4 से 5 हजार में विक्रय हो रही है। वही नगर के आसपास के निर्माणाधीन कॉलोनियों में भी पहुंच रही रेत वैध है अथवा अवैध इस पर भी बड़े सवाल हैं ? कुछ निर्माणाधीन कॉलोनी में रेत का स्टॉक किया हुआ है। जो कि जांच का विषय भी है। बताया जाता है कि सैलेसटियल पार्क, डिबाइन सिटी, पंचवटी परिसर, अग्रवाल हेरिटेज सहित हरदा बायपास के आसपास बन रही कॉलोनियों में भी रेत का स्टॉक देखा जा सकता है। अतः शासन हित में रॉयल्टी की जांच की जा सकती है। जिला खनिज अधिकारी दिवेश मरकाम ने बताया कि खनिज विभाग से वर्तमान में किसी कालोनाइजर द्वारा रेत स्टाॅक की परमिशन नहीं ली गई है। जहां कहीं भी रेत चोरी की शिकायत मिलती है खनिज विभाग की टीम कार्रवाई कर और प्रकरण भी बनाती है। प्रशासन द्वारा जुर्माना की कार्यवाही भी की जाती है। वर्तमान में रेत उत्खनन पर 01अक्टूबर तक एनजीटी की रोक लगी हुई है।


