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*47 हजार 990 करोड़ से होगा प्रदेश का विकास, जानें सीएम डॉ. मोहन ने कैबिनेट में क्या-क्या लिए निर्णय?*

by Manish Gautam Chiefeditor
August 11, 2026
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*47 हजार 990 करोड़ से होगा प्रदेश का विकास, जानें सीएम डॉ. मोहन ने कैबिनेट में क्या-क्या लिए निर्णय?*
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*रानी दुर्गावती राज्य स्तरीय पुरस्कार राशि हुई 2 लाख रुपये*
– *रानी अवन्ती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार राशि 1 लाख रुपये बढ़ी*
– *राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-आयुष्मान भारत के लिए 44 हजार 515.13 करोड़ की स्वीकृति*

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 11 अगस्त को कैबिनेट की बैठक में जन-कल्याण के लिए कई अहम निर्णय लिए। कैबिनेट ने उनके नेतृत्व में प्रदेश के सर्वांगीण विकास, जन-स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण, बुनियादी ढांचे के विस्तार और महिला सशक्तिकरण को गति देने के लिए 47 हजार 990 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की। इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 28,083.47 करोड़ रुपये और आयुष्मान भारत योजना के लिए 12 हजार 123 करोड़ 81 लाख रुपये शामिल हैं। कैबिनेट ने भोपाल को मेट्रो-पोलिटिन सिटी के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा हाईब्रिड एन्यूटी मोडल (HAM) के लिए बनाए गए मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट के आधार पर, भोपाल-विदिशा मार्ग लंबाई 44.830 किमी का 4 लेन मय पेव्हड शोल्डर निर्माण किए जाने के लिए 1,757 करोड़ 55 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। इससे अब औद्योगिक निवेश बढ़ाने के साथ अधोसंरचना का विकास होगा।

कुल परियोजना निर्माण लागत का 40 प्रतिशत हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (एच.ए.एम) अंतर्गत मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा राज्य राजमार्ग निधि से परियोजना क्रियान्वयन के दौरान जीएसटी सहित वहन किया जायेगा। कुल परियोजना निर्माण लागत की शेष 60 प्रतिशत राशि संचालन अवधि में 15 वर्षों तक छः माही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट के माध्यम से किया जाएगा। इसके अतिरिक्त निर्माण पूर्व कार्यकलाप (भू-अर्जन एवं अन्य कार्य) तथा सुपरविजन चार्जेस की राशि रुपये 364 करोड़ 41 लाख रुपये का भुगतान भी राज्य बजट के माध्यम से किया जाएगा। भोपाल विदिशा (राज्यमार्ग-28) मार्ग, अयोध्या बाईपास के भानपुर टी-जंक्शन से प्रारंभ होकर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-146 पर सांची-सलामतपुर जंक्शन पर समाप्त होता है। यह मार्ग भानपुर, चोपड़ाकला, सूखी सेवनिया, डोब, बालमपुर, दीवानगंज और सलामतपुर से गुजरते हुए भोपाल और विदिशा जिलों को जोड़ता है। रायसेन जिले में सांची स्तूप सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थस्थलों में से एक है, जो कि यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल भी है। कर्क रेखा भी भोपाल-विदिशा मार्ग के कि.मी. 24.550 से गुजरती है। भौगोलिक दृष्टि से भी यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है।

*भोपाल बायपास 4-लेन मार्ग पर वर्ष 2031 तक उपभोक्ता शुल्क संग्रहण की स्वीकृति*
कैबिनेट ने मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम अंतर्गत भोपाल बायपास 4-लेन को 6-लेन बनाने के दृष्टिगत मार्ग लम्बाई 51.963 किमी पर 19 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2031 तक उपयोगकर्ता शुल्क संग्रहण की अनुमति प्रदाय की है। साथ ही इसकी अवधि अतिरिक्त 5 वर्ष तक बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग को अधिकृत किया है। भोपाल बायपास पर उपयोगकर्ता शुल्क संग्रहण, पूर्व में जारी अधिसूचना के प्रावधानों के अनुसार यथावत् रखा गया है। उपयोगकर्ता शुल्क संग्रहण का कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड अथवा निगम द्वारा चयनित संग्रहण एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा। भोपाल बायपास 4-लेन मार्ग भोपाल शहर से इन्दौर, रायसेन, विदिशा एवं नर्मदापुरम् जिलों को जोड़ता है। जिससे भोपाल शहरी क्षेत्र का यातायात दबाव कम होने के साथ-साथ यात्रियों को निर्बाध रूप से सुगमतापूर्वक मार्ग उपलब्ध होता है। इसका नियमित संचालन, अनुरक्षण एवं रख-रखाव निगम द्वारा किया जाता है। संग्रहित टोल राशि मध्यप्रदेश राजमार्ग निधि अधिनियम 2012 अंतर्गत स्थापित राज्य राजमार्ग निधि में जमा कराई जाती है, जिसका व्यय निगम द्वारा राज्य मार्गों के विकास एवं संधारण सहित अन्य कार्यों में किया जाता है।

*अब श्रमिकों के साथ रहवासियों को भी मिलेगा लाभांश*
कैबिनेट ने वन विभाग अंतर्गत संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को लाभांश प्रदाय से संबंधित योजना को वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 918 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इस योजना का उद्देश्य संयुक्त वन प्रबंधन अंतर्गत वनों के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए श्रमिकों के साथ रहवासियों की जन-भागीदारी प्राप्त करना है। प्रदेश में संयुक्त वन प्रबंधन समितियां वनों के संरक्षण एवं संवर्द्धन में वन विभाग को समुचित सहयोग प्रदान कर रही है। प्रावधानों के अनुरूप काष्ठ के अंतिम पातन से प्राप्त काष्ठ की बिक्री से प्राप्त राजस्व की 20 प्रतिशत राशि संयुक्त वन प्रबंधन समिति को दी जाती है। साथ ही बांस के विदोहन से प्राप्त शुद्ध लाभ का शत-प्रतिशत, कटाई में संलग्न श्रमिकों को प्रदाय किया जाता है।इस योजना के तहत अब श्रमिकों के साथ ही समिति से जुड़े क्षेत्रों के रहवासियों को भी लाभांश दिया जाएगा।

*इन पुरस्कारों की राशि हुई 2 लाख रुपये*
कैबिनेट ने हर परिस्थिति में संघर्ष करते हुए समाज सेवा करने वाली एक महिला को प्रतिवर्ष राज्य स्तरीय रानी दुर्गावती पुरस्कार राशि 2 लाख रुपये प्रदाय करने और वर्ष 2006 से प्रदाय किए जा रहे रानी अवन्ती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार की राशि को भी एक लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये किए जाने की स्वीकृति दी है। पुरस्कार प्रदान करने से अत्यन्त गरीब, विकलांग 40 प्रतिशत से अधिक एकल महिला, किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त, एसिड, दहेज, घरेलू हिंसा से पीड़ित अथवा अन्य कोई विपरीत स्थिति में संघर्ष करते हुए समाज सेवा के कार्य कर रही महिलाओं की सेवाओं, कार्यों और योगदान को प्रोत्साहन व पहचान मिलेगी। अन्य महिलाएं भी प्रेरणा लेकर महिलाओं और बच्चों के क्षेत्र में समाजसेवा कार्य करने आगे आएंगी। वर्तमान में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कुल 6 पुरस्कार यथा रानी अवंती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार, राजमाता विजयाराजे सिंधिया समाज सेवा पुरस्कार, श्री विष्णु कुमार महिला बाल कल्याण समाज सेवा सम्मान पुरस्कार, मुख्यमंत्री नारी सम्मान रक्षा पुरस्कार, अरुणा शानबाग वीरता पुरस्कार और राष्ट्रमाता पद्मावती पुरस्कार प्रदाय किए जा रहे हैं।

*सौगात-नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट के लिए भूमि आवंटन को मंजूरी*
कैबिनेट ने किसान वर्ष में सोयाबीन किसानों को भी सौगात दी है। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च भारत सरकार के अंतर्गत गठित उपक्रम नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट के लिए ग्राम भाऊखेड़ी तहसील इछावर जिला सीहोर में 20 हेक्टेयर भूमि स्थायी पट्टे पर आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान के राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (ICMR-NSRI) भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत निकाय है, जिसे केन्द्र सरकार द्वारा पूर्ण रूप से वित्त पोषित किया जाता है। यह संस्थान सोयाबीन अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से देश के लगभग 50 लाख सोयाबीन किसानों के हितों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। प्रस्तावित भूमि का उपयोग विशुद्ध रूप से कृषि विज्ञान केन्द्र स्थापित करने के लिये किया जाएगा। इस केंद्र की स्थापना से मध्यप्रदेश में सोयाबीन की खेती में चहुंमुखी प्रगति की उम्मीद है।

*राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और आयुष्मान भारत का रखा ख्याल*
कैबिनेट ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य और आयुष्मान भारत (नॉन एस. ई. सी. सी. हितग्राही), बहुउद्देशीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम, स्वास्थ्य संस्थाओं की सुरक्षा एवं सफाई व्यवस्था, जिला स्तरीय अमला से संबंधित योजनाओं के 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए कुल 44 हजार 515.13 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 28,083.47 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भारत सरकार से 60:40 के अनुपात में संचालित है। यह योजना केन्द्र प्रवर्तित है एवं प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम जैसे मातृ स्वास्थ्य, शिशु स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, टीकाकरण, टी.बी. उन्मूलन, शिशु स्वास्थ्य पोषण, सिकल सेल, किशोर स्वास्थ्य, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, गैर-संचारी कार्यक्रम, अंधत्व निवारण, कुष्ठ उन्मूलन, प्रधानमंत्री डायलिसिस सेवा, निःशुल्क दवा एवं जांच इत्यादि स्वास्थ्य कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है। स्वीकृति अनुसार आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य और आयुष्मान भारत (नॉन एस. ई. सी. सी. हितग्राही) के संचालन के लिए 12 हजार 123 करोड़ 81 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। योजना अंतर्गत गरीब एवं कमजोर वर्ग को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जाती है। स्वास्थ्य व्यय के कारण होने वाली आर्थिक हानि को रोकते हुए सरकारी एवं सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण उपचार कैशलेस रूप में उपलब्ध कराना आवश्यक है। सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य की पूर्ति, उपचार तक सहज पहुंच तथा सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना ही इस योजना का प्रमुख आधार है। स्वास्थ्य संस्थाओं की सुरक्षा एवं सफाई व्यवस्था के लिए 1,159 करोड़ 58 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। जिला स्तरीय अमला योजना के लिए 654 करोड़ 84 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। जिला स्तरीय अमला योजना लगभग 40-50 वर्ष से संचालित है।

*कृषि विश्वविद्यालय के निरंतर संचालन के लिए 795 करोड़ 59 लाख रुपये की स्वीकृति*
कैबिनेट ने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय को वेतन भत्तों मानदेय आदि के लिए ब्लाक ग्राण्ट योजना के आगामी 05 वर्षो वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 795 करोड़ 59 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। वर्तमान में विश्वविद्यालय के अधीन 11 महाविद्यालय और 8 अनुसंधान केन्द्र संचालित हैं, जिनके माध्यम से कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं कृषि विस्तार संबंधी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। विश्वविद्यालय में कार्यरत अधिकारियों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के अतिरिक्त लगभग 500 ओल्ड पेंशनरों के वेतन, भत्तों, मानदेय एवं पेंशन संबंधी वित्तीय दायित्वों के साथ-साथ संस्थानों के आवश्यक प्रशासनिक एवं आकस्मिक व्ययों की पूर्ति राज्य शासन द्वारा ब्लॉक ग्रांट के माध्यम से की जाती है।

*खनिज साधन विभाग की परिसंपत्तियों का संधारण*
कैबिनेट ने खनिज साधन विभाग अंतर्गत विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण से संबंधित योजना के वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 2 करोड़ 50 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। खनिज साधन विभाग में कुल 54 खनिज भवन है। खनिज भवनों को निर्मित हुए 10 वर्ष से अधिक की अवधि हो चुकी है इसलिए योजना अंतर्गत भवनों में मरम्मत तथा संधारण का कार्य निरंतर रूप से कराया जा रहा है। कैबिनेट ने देवास जिले में 14 मई 2026 को टोकंकला में स्थित पटाखा फैक्ट्री में घटित दुखद अग्नि दुर्घटना की न्यायिक जांच के लिए सुभाष काकड़े सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति, उच्च न्यायालय जबलपुर की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग गठित किए जाने और जांच आयोग के कार्यकाल में तीन माह 14 अगस्त 2026 तक की वृद्धि किए जाने के संबंध में जारी अधिसूचना का अनुसमर्थन किया। मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के 63वें, 64वें और 68वें वार्षिक प्रतिवेदन एवं जिन प्रकरणों में आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की गई है, उनके संबंध में ज्ञापन के साथ विधान सभा के पटल पर रखे जाने का अनुमोदन दिया है।

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