कटनी। जिले के शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को समय पर निःशुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा तय रोड मैप और लाखों रुपये का बजट कटनी शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। स्कूलों तक पुस्तकें सुरक्षित पहुंचाने के लिए बाकायदा ठेका जारी किया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि ठेका कंपनी का काम खुद शासकीय स्कूलों के शिक्षक करने को मजबूर हैं।
*शिक्षकों पर बनाया जा रहा वितरण प्रमाण पत्र का दबाव*
जिलेभर से सामने आ रहे व्हाट्सएप स्क्रीनशॉट (जैसे जन शिक्षा केंद्र पिपरोध और हीरापुर कौड़िया) ने इस फर्जीवाड़े की पोल खोलकर रख दी है। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा शिक्षकों को व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज भेजकर जन शिक्षा केंद्रों से खुद पुस्तकें ले जाने के कड़े निर्देश दिए जा रहे हैं। पढ़ाई-लिखाई छोड़कर शिक्षक किताबें ढोने में लगे हैं। हद तो तब हो गई जब परिवहन ठेकेदार के बजाय शिक्षकों पर ही ‘पुस्तक वितरण प्रमाण पत्र’ जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है, ताकि कागजी कोरम पूरा कर ठेकेदार को भुगतान का रास्ता साफ किया जा सके।
*25 से 27 लाख का ठेका, फिर भी कागजों पर परिवहन*
सूत्रों के अनुसार, जिले में पुस्तकों के सुचारू परिवहन के लिए ‘जय माँ जालपा समूह’ को लगभग 25 से 27 लाख रुपये का कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) जारी किया गया है। इतनी बड़ी राशि का ठेका होने के बावजूद ठेका कंपनी सिर्फ इक्का-दुक्का जगहों पर दिखावे के लिए किताबें पहुंचा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि जब परिवहन का पूरा काम शिक्षक ही कर रहे हैं, तो ठेका कंपनी को लाखों रुपये का भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है?
*कलेक्टर की फटकार के बाद BRC को नोटिस जारी*
मामले को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित किए जाने और शिकायत दर्ज होने के बाद कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर की फटकार के बाद विभाग में हड़कंप मच गया, जिसके चलते जिला परियोजना समन्वयक (DPC) ने बीआरसी (BRC) मनोज गौतम को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
स्थानीय जनशिक्षकों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस पूरे घोटाले की किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराई जाए, तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों और ठेका कंपनी की सांठगांठ का एक बड़ा खुलासा हो सकता है।


