कटनी।
प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने जब स्वयं ‘निक्षय मित्र’ बनकर टीबी मरीजों के पोषण की जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया, तो यह पहल धीरे-धीरे प्रशासन की सीमा से निकलकर समाज के दिल तक पहुंच गई।
कलेक्टर कटनी आशीष तिवारी की पहल से प्रेरित होकर शासकीय कर्मचारी, समाजसेवी और उद्योगपति एक-एक करके आगे आए। किसी ने एक मरीज की जिम्मेदारी उठाई, किसी ने कई मरीजों के पोषण की चिंता की। देखते ही देखते 415 लोग ‘निक्षय मित्र’ बन गए और करीब 5 लाख रुपए की सहयोग राशि जिला रोगी कल्याण समिति को मिल चुकी है।
यह सिर्फ फूड बास्केट नहीं, ‘आप अकेले नहीं हैं’ का संदेश है
टीबी से जूझ रहे मरीज के लिए उपचार के साथ पर्याप्त पोषण भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसी जरूरत को समझते हुए कलेक्टर श्री तिवारी के निर्देश पर उपचाररत मरीजों को पोषणयुक्त फूड बास्केट उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
जब यह फूड बास्केट किसी मरीज तक पहुंचती है तो उसके साथ एक अनकहा संदेश भी पहुंचता है—
“बीमारी से लड़ाई आपकी अकेली नहीं है… हम आपके साथ हैं।”
यही इस अभियान की सबसे खूबसूरत बात है।
*मरीजों के दिलों तक पहुंची पहल*
इस अभियान में उद्योग विभाग ने 70 मरीजों के लिए 84 हजार रुपए, मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन ने 38 मरीजों के लिए 45,600रूपये, इंडस्ट्री विभाग ने 50 मरीजों के लिए 60 हजार रुपए तथा पीआईयू एवं पीडब्ल्यूडी ने 25 मरीजों के लिए 30 हजार रुपए का सहयोग दिया।
आबकारी और पंजीयन विभाग ने 35-35 मरीजों के लिए 42-42 हजार रुपए, परिवहन विभाग ने 50 मरीजों के लिए 60 हजार रुपए और फेयर फूड ओवरसीज प्रा.लि. ने 51 मरीजों के लिए 61,200 रूपए की सहयोग राशि दी।
विद्युत विभाग, बरही तहसील, मानव जीवन विकास समिति बिजौरी, उद्यानिकी एवं महिला एवं बाल विकास विभाग सहित अनेक संस्थाओं ने भी अपनी सहभागिता निभाई।
इन आंकड़ों को केवल राशि के रूप में देखना इस पहल की असली कहानी को छोटा कर देगा। हर राशि के पीछे किसी मरीज के लिए बढ़ा एक हाथ है।
पोषण समाज का और हौसला सबका
टीबी उन्मूलन की लड़ाई में स्वास्थ्य विभाग उपचार की जिम्मेदारी निभा रहा है। लेकिन इस अभियान ने यह साबित किया है कि बीमारी के खिलाफ लड़ाई को मजबूत बनाने में समाज की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
दवा उपचार देती है, पोषण शरीर को ताकत देता है और अपनत्व मरीज के मन में लड़ने का हौसला जगाता है।
यही तीनों मिलकर टीबी के विरुद्ध कटनी की लड़ाई को नई ताकत दे रहे हैं।
कलेक्टर की पहल बनी जनअभियान की प्रेरणा
कलेक्टर श्री आशीष तिवारी का स्वयं निक्षय मित्र बनना इस अभियान की शुरुआत भर थी। इसके बाद शासकीय अमले, समाजसेवियों और उद्योग जगत का आगे आना बताता है कि संवेदनशील नेतृत्व जब समाज को साथ लेकर चलता है तो एक छोटी पहल भी बड़े अभियान का रूप ले सकती है।
आज करीब 5 लाख रुपए की सहयोग राशि से कहीं बड़ी पूंजी कटनी के पास है—मानवीय संवेदना की पूंजी।
‘टीबी मुक्त कटनी’ की राह में उम्मीद के 415 दीप
टीबी मुक्त भारत का सपना केवल सरकारी प्रयासों से पूरा नहीं होगा। इसके लिए हर स्तर पर जागरूकता, उपचार, पोषण और सामाजिक सहयोग जरूरी है।
कटनी में 415 निक्षय मित्रों ने इस दिशा में उम्मीद के 415 दीप जलाए हैं।
इन दीपों की रोशनी में शायद कोई मरीज फिर से अपने परिवार के बीच स्वस्थ जीवन की ओर लौटेगा। किसी घर में चिंता कम होगी। किसी बच्चे को अपना माता-पिता फिर स्वस्थ नजर आएगा। और किसी परिवार को यह भरोसा मिलेगा कि बीमारी बड़ी हो सकती है, लेकिन उसके सामने खड़ा समाज उससे भी बड़ा है।
जहां करीब 5 लाख रुपए की सहयोग राशि से कहीं अधिक मूल्यवान है 415 लोगों का यह संकल्प कि टीबी से जूझ रहे किसी इंसान को उसकी लड़ाई में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। जिले में अभी भी निक्षय मित्र बनने का सिलसिला जारी है।


