*कटनी में सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ा रहे निजी स्कूल वाहन, सफेद मैजिक, ऑटो में ठूंस-ठूंस कर बिठाए जा रहे मासूम*
कटनी/जिले में संचालित कई निजी स्कूल बच्चों की सुरक्षा से किस कदर खिलवाड़ कर रहे हैं, इसकी एक डरावनी तस्वीर सड़कों पर साफ देखी जा सकती है। आरटीओ और यातायात पुलिस की कथित अनदेखी के चलते शहर और ग्रामीण इलाकों में बिना नंबर प्लेट, बिना पहचान और ओवरलोड स्कूल वैन तथा मैजिक वाहन बेधड़क दौड़ रहे हैं।
स्थानीय निवासियों और अभिभावकों का कहना है कि नियमों को ताक पर रखकर सफेद रंग की कमर्शियल व प्राइवेट मैजिक गाड़ियों को स्कूल वाहन के रूप में चलाया जा रहा है। इन वाहनों पर न तो विद्यालय का नाम लिखा है, न ही “ऑन स्कूल ड्यूटी” का कोई बोर्ड लगा है।
*क्षमता से दोगुने बच्चे, खड़े होकर सफर की मजबूरी*
स्थिति यह है कि 7 से 8 सवारी की क्षमता वाले मैजिक वाहनों में 15 से 20 मासूम बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जा रहा है। कई गाड़ियों में तो जगह न होने के कारण छात्र पीछे लटककर या खड़े होकर खतरनाक सफर करने को मजबूर हैं। जरा सी चूक या तेज रफ्तार में ब्रेक लगने पर कोई बड़ा हादसा घट सकता है।
*सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी*
नियमों के मुताबिक, स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों का रंग पीला होना अनिवार्य है। साथ ही गाड़ी में स्पीड गवर्नर, अग्निशामक यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स और जालीदार खिड़कियां होनी चाहिए। लेकिन कटनी की सड़कों पर दौड़ रहे अधिकांश अनधिकृत वाहनों में इनमें से एक भी मानक पूरा नहीं होता।
*अभिभावकों में पनप रहा आक्रोश*
लगातार सामने आ रही इस लापरवाही से अभिभावकों में गहरा असंतोष है। उनका कहना है कि भारी-भरकम फीस वसूलने वाले स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह गैर-जिम्मेदार बने हुए हैं।


