कलेक्टर श्री आशीष तिवारी की पहल पर समयसीमा में निर्देशों का पालन, अस्थायी रोक हटाकर पुनः शुरू हुआ संचालन
🔳कटनी – जिला प्रशासन की सख्ती, पारदर्शिता और संवाद आधारित कार्यप्रणाली का सकारात्मक परिणाम बरही क्षेत्र में देखने को मिला है। शासकीय भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए दिए गए निर्देशों का क्रेशर संचालकों द्वारा निर्धारित समयसीमा में पालन किए जाने के बाद प्रशासन ने बरही क्षेत्र के स्टोन क्रेशरों पर लगाई गई अस्थायी रोक हटा दी है। अब संबंधित इकाइयों को पूर्व की भांति केवल स्वीकृत और वैधानिक क्षेत्र में संचालन की अनुमति प्रदान कर दी गई है।
कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देश पर जिला प्रशासन ने शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई के बाद मौके पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन कराया। निरीक्षण में यह पाया गया कि संबंधित क्रेशर संचालकों ने स्वयं आगे बढ़कर शासकीय भूमि से कन्वेयर बेल्ट, मशीनरी से संबंधित ढांचे तथा अन्य सामग्री को हटा लिया है।
*संयुक्त टीम ने किया स्थलीय निरीक्षण*
एसडीएम विजयराघवगढ़ श्री विवेक गुप्ता के नेतृत्व में राजस्व, खनिज एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने बरही तहसील के ग्राम कन्नौर स्थित खदानों एवं स्टोन क्रेशर इकाइयों का विस्तृत निरीक्षण किया। टीम ने शासकीय भूमि खसरा क्रमांक 681 का भी परीक्षण किया, जहां पूर्व में प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी।
निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि शासकीय भूमि पूरी तरह खाली हो चुकी है और भविष्य में किसी भी प्रकार का संचालन केवल स्वीकृत अनुज्ञप्ति क्षेत्र के भीतर ही किया जाएगा।
*क्रेशर संचालकों ने दिखाई जिम्मेदारी*
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि जिन इकाइयों की कन्वेयर बेल्ट अथवा अन्य संरचनाएं शासकीय भूमि तक पहुंच गई थीं, वहां संचालकों ने प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए स्वयं संरचनाओं को हटाया और भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया। प्रशासन ने इसे सकारात्मक सहयोग और नियमों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार बताते हुए संचालन पर लगी अस्थायी रोक समाप्त कर दी।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि भविष्य में किसी भी प्रकार के विस्तार अथवा निर्माण कार्य के लिए वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
*तीन दशक से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का आधार है क्रेशर उद्योग*
बरही, विचपुरा और कन्नौर क्षेत्र पिछले लगभग 30 वर्षों से गिट्टी एवं स्टोन क्रेशर उद्योग के प्रमुख केंद्र रहे हैं। इन उद्योगों ने न केवल क्षेत्रीय विकास में योगदान दिया है, बल्कि हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी उपलब्ध कराया है।
ग्राम कन्नौर में वर्ष 2004 से श्री केशव प्रसाद अवस्थी द्वारा विधिवत स्वीकृत खदान एवं क्रेशर संचालन किया जा रहा है, जबकि वर्ष 2014 से श्री त्रिलोक ग्रोवर द्वारा महालक्ष्मी फर्म के माध्यम से खदान और क्रेशर इकाइयों का संचालन किया जा रहा है। उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ कुछ संरचनाएं स्वीकृत क्षेत्र से बाहर चली गई थीं, जिसके कारण प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी।
*लीज अवधि समाप्त होने के बाद शुरू हुई प्रक्रिया*
जानकारी के अनुसार संबंधित खदानों के लिए स्वीकृत सब्सिडियरी पर्पज़ लीज की अवधि समाप्त होने के बाद उसका नवीनीकरण नहीं हो सका था। इसके बाद कलेक्टर न्यायालय के निर्देशों के तहत तहसीलदार बरही द्वारा सीमांकन कर शासकीय भूमि से सामग्री हटाने के आदेश जारी किए गए थे।
नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने एहतियातन संबंधित क्रेशर इकाइयों के संचालन पर अस्थायी रोक लगा दी थी। अब सभी निर्देशों का पालन और अतिक्रमण हटने के बाद संयुक्त टीम ने संतोष व्यक्त करते हुए संचालन को पुनः बहाल कर दिया है।
*कानून का सम्मान और उद्योगों का संरक्षण—दोनों साथ*
बरही की यह कार्रवाई इस बात का उदाहरण है कि जिला प्रशासन जहां एक ओर शासकीय भूमि और सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है, वहीं दूसरी ओर नियमों का पालन करने वाले उद्योगों और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए भी संवेदनशील है। प्रशासन की यह पहल विकास और वैधानिक व्यवस्था के बीच संतुलन स्थापित करने का एक सकारात्मक मॉडल बनकर सामने आई है।
निरीक्षण एवं कार्रवाई के दौरान एसडीएम श्री विवेक गुप्ता, उप संचालक खनिज श्री रत्नेश दीक्षित, सहायक खनिज अधिकारी श्री पवन कुशवाहा एवं श्री कमलाकांत परस्ते, राजस्व विभाग के अधिकारी तथा बरही थाना पुलिस का अमला उपस्थित रहा।


