*योगेश गजभिये पांढुरना*.3 करोड़ 59 लाख रुपये की लागत से बनने वाले राज भोज कॉम्प्लेक्स के भूमिपूजन समारोह पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। जिस कार्यक्रम को शहर के बड़े विकास कार्य के रूप में प्रचारित किया गया, वह जनता की कम भागीदारी, प्रशासनिक अव्यवस्था और जल्दबाजी के कारण विवादों में आ गया।
सबसे बड़ा सवाल यह रहा कि भूमिपूजन समारोह में आम नागरिकों और गणमान्य लोगों की उपस्थिति बेहद कम दिखाई दी। आरोप है कि खाली कुर्सियां भरने के लिए बड़ी संख्या में नगर पालिका कर्मचारियों को समारोह स्थल पर बुलाया गया, जिसके चलते नगर पालिका कार्यालय लगभग खाली नजर आया। इससे कार्यालय पहुंचे लोगों को अपने कार्यों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा।
‘चक्रवर्ती राजा भोज’ के सम्मान में भी चूक:-
विवाद उस समय और बढ़ गया जब कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए होर्डिंग में ‘चक्रवर्ती राजा भोज’ के बजाय केवल ‘राज भोज कॉम्प्लेक्स’ लिखा गया। इसे लेकर कई लोगों ने आपत्ति जताई और इसे महान सम्राट राजा भोज के सम्मान के विपरीत बताया। कुछ पवारट समाज के लोगो के विरोध के बाद नगर पालिका कर्मचारियों ने कार्यक्रम के दौरान ही आनन-फानन में कटआउट लगाकर नाम में सुधार करने का प्रयास किया। इससे सवाल उठ रहे हैं कि करोड़ों रुपये की परियोजना के भूमिपूजन जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में इतनी बड़ी चूक आखिर कैसे हो गई।
निमंत्रण में बड़े नाम, लेकिन प्रभारी मंत्री नहीं पहुंचे:-
नगर पालिका द्वारा जारी आमंत्रण पत्र में प्रभारी मंत्री प्रधुम्न सिंह तोमर, सांसद बंटी विवेक साहू, विधायक नीलेश उइके और पूर्व शिक्षा मंत्री नानाभाऊ मोहोड़ सहित कई जनप्रतिनिधियों के नाम प्रकाशित किए गए थे। हालांकि कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही।
11 बजे का कार्यक्रम, दोपहर 2 बजे हुआ भूमिपूजन:-
कार्यक्रम का निर्धारित समय सुबह 11 बजे था, लेकिन मुख्य भूमिपूजन लगभग दोपहर 2 बजे शुरू हुआ। करीब तीन घंटे की देरी से कार्यक्रम शुरू होने पर आमंत्रित अतिथियों और उपस्थित लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।
विकास के साथ व्यवस्थाओं पर भी सवाल:-
भाजपा पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद आम नागरिकों की भागीदारी अपेक्षाकृत कम दिखाई दी। ऐसे में शहर में चर्चा है कि करोड़ों रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के भूमिपूजन को जनभागीदारी का उत्सव बनाने के बजाय महज औपचारिक आयोजन बनाकर रख दिया गया।
सीएमओ ने क्या कहा?
मुख्य नगर पालिका अधिकारी हेमलता पटले से इस संबंध में जानकारी लेने पर उन्होंने कहा कि यह नगर पालिका का आधिकारिक आयोजन था, इसलिए कर्मचारियों की उपस्थिति स्वाभाविक थी।
हालांकि कार्यक्रम से जुड़े अन्य सवालों—जनभागीदारी की कमी, कार्यालय के खाली रहने, होर्डिंग में हुई त्रुटि और कार्यक्रम में हुई देरी—को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर जारी है।


