रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। क्रिकेट संघों में चल रही गड़बड़ी की वास्तविक जानकारी सहित मध्यप्रदेश क्रिकेट संघ की गतिविधियों को लेकर अध्यक्ष/ सचिव मध्यप्रदेश क्रिकेट संघ इंदौर और नर्मदापुरम संभागीय क्रिकेट एसोसिएशन होशंगाबाद द्वारा पत्राचार के बाद भी जानकारी नहीं दिए जाने के उपरांत नगर के सीनियर खिलाड़ी और समाजसेवी आनंद मिश्रा द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर में वर्ष 2023 में याचिका दायर की गई थी। जिसे उच्च न्यायालय द्वारा स्वीकार करते हुए याचिका में पक्षकार बनाए गए 8 लोगों को नोटिस जारी किया गया था। याचिकाकर्ता आनंद मिश्रा द्वारा अवगत कराया गया कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए नोटिस में 7 लोगों से नोटिस तामील कराया जा चुका है परंतु नर्मदापुरम जिला क्रिकेट एसोसिएशन अध्यक्ष का नोटिस तामील नहीं हो रहा था।
जिस पर मा. उच्च न्यायालय द्वारा हमदस्त नोटिस जारी किया गया। जिस पर पिछले दिनों याचिकाकर्ता स्वयं अपने वकील के साथ हमदस्त नोटिस लेकर नर्मदापुरम जिला क्रिकेट एसोसिएशन अध्यक्ष राजेश चौरे के घर पर पहुंचे थे, परंतु उनके द्वारा नोटिस लेने से इंकार कर दिया। अवगत हो कि उक्त नोटिस नर्मदापुरम जिला क्रिकेट एसोसिएशन अध्यक्ष को प्रतिवादी क्रमांक 8 के रूप में जारी किया गया और 2 जुलाई 2026 तक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस तामील के विषय को लेकर जब राजेश चौरे से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि प्रॉपर्टी संबंधी विवाद होने के कारण मेरे द्वारा नोटिस नहीं लिया गया। जिसका क्रिकेट से कोई विषय नहीं है। याचिकाकर्ता श्री मिश्रा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के दो महत्वपूर्ण आदेश 17 जुलाई 2016/ 2016_8_एससीसी_533 और 09 अगस्त 2018 /2018_9_एससीसी_264 लोढ़ा कमेटी की सिफारिश को लागू संबन्धी आदेश है। जिसे जिला स्तर पर अनुपालन किए जाने के लिए भी लिखा था। लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार करते हुए क्रिकेट संघों में पारदर्शिता लाने आदि विषयों पर (रिव्यू) नए सिरे से अनुपालन एवं नियम बनाने के लिए कहा था। श्री मिश्रा ने बताया कि उन्होंने कई पत्राचार नर्मदापुरम संभाग व जिला क्रिकेट संघ सहित एमपीसीए इंदौर को किए थे। जिसमें 1998-99 से लेकर 2020 तक की ऑडिट रिपोर्ट में बैलेंस शीट को सार्वजनिक करने, 10 वर्षों के सभी चयनित क्रिकेट खिलाड़ियों की सूची तथा सभी पदाधिकारी, सदस्य के नाम,चयन प्रक्रिया, कमेटियों के सदस्य, कर्मचारियों के नाम, चल अचल संपत्तियों को सार्वजनिक करने का निवेदन किया था। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 2023 में माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका लगाई गई और जिसमें आठ लोगों को पक्षकार बनाया गया। जिस पर सुनवाई चल रही है।


