कटनी।
शहर की सबसे व्यस्त और प्रतिष्ठित सब्जी, फल और कृषि उपज मंडी इन दिनों अपनी बदहाली और गंदगी के आंसू रो रही है। स्वच्छ भारत अभियान के दावों के बीच मंडी परिसर की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर करती हैं। मंडी में चारों तरफ कचरे के ढेर लगे हुए हैं, जिससे उठने वाली सड़ांध ने यहाँ आने वाले किसानों, व्यापारियों और आम ग्राहकों का जीना दूभर कर दिया है।
*परिसर के बीचों-बीच कचरे का साम्राज्य*
मंडी परिसर की तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि जहाँ गाड़ियों का आवागमन होता है और जहाँ व्यापार किया जाता है, ठीक उसी मुख्य मार्ग पर कचरे और सड़ी-गली सब्जियों का अंबार लगा हुआ है। प्लास्टिक की थैलियों, बोरियों और मलबे से पटे ये ढेर कई दिनों से नहीं हटाए गए हैं।
*बीमारियों का बढ़ा खतरा, आवारा पशुओं का जमावड़ा*
बारिश और उमस के इस मौसम में सड़ रही सब्जियों के कारण पूरे इलाके में तीव्र दुर्गंध फैली हुई है। इस गंदगी की वजह से यहाँ बड़े पैमाने पर मक्खियाँ और मच्छर पनप रहे हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। इसके अलावा, कचरे के ढेरों पर आवारा पशु (जैसे गाय और सांड) मुंह मारते नजर आते हैं, जिससे मंडी में आने वाले लोगों के साथ दुर्घटना होने का डर भी हमेशा बना रहता है।
*व्यापारियों और किसानों में भारी आक्रोश*
मंडी में अपनी उपज बेचने आने वाले किसानों और स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि वे नियमित रूप से मंडी टैक्स और शुल्क चुकाते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाएं और साफ-सुथरा माहौल नहीं मिल पा रहा है। वाहनों के ठीक बगल में लगे गंदगी के ढेर के कारण माल लोड और अनलोड करने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
करोड़ों रुपये के राजस्व वाले इस कृषि उपज मंडी परिसर की ऐसी दुर्दशा मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। नियमित रूप से सफाई न होना और कचरे का समय पर निस्तारण न किया जाना स्थानीय अधिकारियों की उदासीनता को दर्शाता है।
*स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने प्रशासन से मांग* की है कि इस गंदगी को तत्काल प्रभाव से साफ कराया जाए और मंडी परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं, ताकि यहाँ आने वाले लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ न हो। मीडया सूत्र


